यादों का तूफ़ान और आंसुओं की बारिश।

ये यादों का तूफ़ान, ये आंसुओं की बारिश, बीती बातों को फिर जीने की ख्वाहिश, इस ख्वाहिश की फरियाद करके, रोना भी नहीं आता अब तो। ख़ुशनसीब हैं वो लोग जो रो लेते हैं, अपनी मर्ज़ी से, दर्द आ जाता है बाहर आँसू बनकर, हल्का हो जाता है मन। मेरा तो कमबख्त दिमाग़ भी कहता…

राह…

जब ज़िन्दगी प्रश्न पूछती है, तो आप क्या जवाब देते है?