ये यादों का तूफ़ान, ये आंसुओं की बारिश,
बीती बातों को फिर जीने की ख्वाहिश,
इस ख्वाहिश की फरियाद करके,
रोना भी नहीं आता अब तो।
ख़ुशनसीब हैं वो लोग जो रो लेते हैं,
अपनी मर्ज़ी से,
दर्द आ जाता है बाहर आँसू बनकर,
हल्का हो जाता है मन।
मेरा तो कमबख्त दिमाग़ भी कहता है,
रोना भी अब तेरे बस का नहीं,
वो नमकीन पानी तेरी आँखों में नहीं।
घुटन ही है, अब तेरी क़िस्मत में।
ज़िन्दगी का सफ़र आज किस मोड़ पर ले आया है,
जिनको दिल से अपना माना है,
उन्हीं को आज छोड़कर जाना है।
खींचती है यादों की गूँज,
मुझे अपने मायाजाल में,
जैसे पूछती हो मुझसे वो,
एक अपने ही अंदाज़ में,
यार थे, निभा गए वो अपनी यारी|
बंधन है जीवन भर का,
कब आएगी तेरी बारी?
यादों को बयां, किया न जायेगा,
जो बीत गया पल वो लौट के न आएगा,
जो यार मिले बड़ी मन्नतों से,
उनसे बिछड़ना अब सहा न जायेगा।
थम सी गई यह सोच कर मेरी साँस,
न आगे मुझसे कुछ और लिखा जायेगा….

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