जब ज़िंदगी करवटें बदलती है।।

 

कर दिया है शुरू, बदलना
करवटें ज़िन्दगी ने,
चाहती है, मसलना
तख़्त को पलटना,
अपने अंदाज़ से।
अँधेरा,
करके आँखों के आगे
उम्मीद करती है,
दिखेगा,
मुझे इस धूल के भी आगे।
धूल से उठा तूफ़ान, चुप्पी लगी ज़ुबान,
सफलता मांगती हो जैसे लगान।
हवाएं लाना चाहतीं हैं,
बेजान पत्तो में जान।
दिखाकर अपनी झूठी शान,
हम भूल गए अपनी ही पहचान।
दिखते थे, सैकड़ों, तारे आकाश में,
कहने को अब भी हैें मौजूद,
बस बादलों ने बदल डाली है अपनी राह,
चेहरे पर चढ़ाई है मैंने,
एक झूठी मुस्कुराहट,
आस है, शायद मुझे भी मिलेगी राहत।
प्यास है, बस मिलता नहीं पानी,
सूखा है गला, हो गया हूँ हताश,
जो बदली मेरी ज़िंदगी,
नहीं बची अब कोई आस,
बह गया जो ये वक़्त,
रेत की भांति हाथों से,
हुई करती थी चंचलता,
मेरी भी बातों में।
ऐ ज़िंदगी तूने मुझे अपना,
असली रंग दिखा दिया।
बचपन को मार कर,
मुझे वयस्क बना दिया,
मुझमें परिवर्तन ला दिया,
करवटें बदलना सीखा दिया,
मतलबी बना दिया,
ऐ ज़िन्दगी तूने मुझे ज़िंदा रखकर भी मुर्दा बना दिया।।

Picture taken from: hdwallpapersrocks.com 
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