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मैं तेरी कोख की सीप में पली
नौ महीनों में जाकर सच्चा मोती बनी
मेरे जन्म पर मैंने तेरा रूप जो लिया
और हुई मैं तेरी तरह , तेरा दुध जो पीया
मैं बड़ी हुई तेरे सपनों की कुँजी बन गई
मेरी जिंदगी तेरी जिंदगी भर  की पूँजी बन गई
मैं तेरी आँखों में छिपी हुई नरमाई हूँ
माँ, मैं तेरी परछाई हूँ

तेरा गुरूर, गर्व, स्वाभिमान हूँ मैं
जानती हूँ तेरी जिंदगी, जान हूँ मैं
तेरा लहू मेरी रगों में दौड़ रहा है
तू जो पाई-पाई मेरे लिए जोड़ रहा है
तेरा मकसद मेरी हर ज़रुरत पूरा करना है
और मेरे देखे हर सपने में रंग भरना है
मैं तेरे कानों में हर पल गुँजती शहनाई हूँ
पिता, मैं तेरी परछाई हूँ

मेरी उंगली पकड़ कर जो तूने चलना सिखाया था
मेरे जन्म पर जैसे तेरा बचपन मुस्कुराया था
मेरा हाथ पकड़ कर तू जैसे काम करवाती थी
स्कूल में मेरे हिस्से की डाँट भी तू खाती थी
तुझसे ही सीखा हर लब्ज़, हर कहानी मैंने
तेरे साये में ही जीयी है जिंदगानी मैंने
मैं सिर्फ तेरी बहन नहीं, तेरा भाई हूँ
दीदी, मैं तेरी परछाई हूँ

तुझमें दादी का शांत स्वभाव छिपा है
पापा जैसा हँसी-ठिठोली का चाव छिपा है
माँ के दिए संस्कारों की मूरत है तू
दीदी की समझदारी की सूरत है तू
मेरे बचपने को तूने अपने अंदर समेटा है
सबकी नज़रों में तू अच्छा बेटा है
और तू दुनिया का सबसे अच्छा भाई है
हाँ, तू हम सबकी परछाई है|

Piture taken from: www.ghostsnghouls.com 

 

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