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क्यूँ किसी की मासूमियत एक अभिशाप है,
क्यों मेरा फायदा दूसरे का नुकसान है,
क्यूँ कोई किसी की मदद नहीं करना चाहता,
क्यूँ हर कोई अपना ही भला है चाहता।
जानना चाहता हूँ मैं कि क्यों मैं ऐसा कर रहा हूँ,
बदलना चाहिए मुझे और आशा सबसे कर रहा हूँ।
बस ख़ुश रहने के लिए सिसक रहा हूँ,
गम भी तो ज़िन्दगी का एक हिस्सा है
मैं उसे क्यों भूल रहा हूँ।
उदासी कभी जाती नहीं,
खुशियाँ कभी टिक पाती नहीं।
इस चक्रव्यूह में फंसकर,
ज़िंदगी की अहमियत को क्यूँ भूल रहा हूँ।
शांति में भी भयंकर शोर सुन रहा हूँ,
ज़ुबाँ से कुछ, आँखों से कुछ और बोल रहा हूँ,
जानना चाहता हूँ मैं, कि आखिर मैं कर क्या रहा हूँ।

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