महफिल-ए-गम

जिंदगी उधार हो गई है सबकी, कि कुछ पल भी अपने नहीं रहे कोई है नहीं सुनने वाला, जो दिल पर गुजरी वो किसे कहे खामोशियाँ भी अब चीखती हैं कि इस दर्द को अब कैसे सहे बंधन बन गया है हर रिश्ता, चुभने लगी है हर कसम आँखें अब सुखती नहीं है, है अश्कों…

मेरी वो

आपने देखा तो होगा ही उसे चहकते हुए, मगर बहुत बार कुछ डूबी सी टहलते हुए, लगता है नाम जैसी खुशनूमा नहीं है, मन कहता है चाहे कुछ भी हो वो बेवफ़ा नहीं है, बेवफ़ाई का तो अर्थ भी नहीं समझती है वो, चाहे रुसवाई से हर पल रूबरू रहती है वो, चेहरे से तो…

जिंदगी का दर्द

ज़ख्म ज़िन्दगी के न भरतें हैं ज़िन्दगी भर, बस इस उम्मीद में ही जिए जातें हैं, ज़रा सा झोंका बस याद का आया नहीं कि बिन छुए हुए ही सब ज़ख्म उभर आतें हैं, गुनगुनाते हैं फिर से वही दास्तां उसी दुःख की ओर खिंचे जाते हैं कहीं बांह फैलाए खड़ी होगी कोने में ख़ुशी,…

विलीनता

विलीनता क्या है? मुक्ति है या कोई सज़ा है? यहाँ हर कोई हर चीज़ के हर बार विलीन होने से डरता है मगर हर दूसरे को, हर दूसरी चीज़ को कई बार विलीन करता है देखों इन धुँए के बादलों को, इन्हें भी डर है विलीनता का, जन्म से मृत्यु तक, ये सफर है विलीनता…

कहानी

नायिका जब मुस्कुराती है बस तभी एक कहानी शुरु हो जाती है बढ़ती जाती है आगे-आगे वो अपने नायक का हाथ थामे गुजरती है कई गलियारों से नायिका के नैनों के इशारों से पार होता है बचपन और आती है उसकी जवानी ऐसे ही बनती है हर कहानी खिलखिलाती है फिर खुशियों की धूप में…

इश्क तेरा मेरा

पलछिन के पार, हो तेरा-मेरा संसार चाँद की बाहों में घर हो हमारा हवाओं के साथ बहते चले हम सिर्फ हमारा हो सूरज का उजियारा यहाँ नहीं, किसी दूर जहाँ में हमारा वास हो जहाँ सिर्फ तू ही मेरे आस-पास हो और किसी की ज़रुरत ही क्या जब तुझसे ही मैं पूरी होऊँ आँखें खोलूं…

मेरे गाँव की शाम

मैं शाम को बैठती हूँ जब मेरे घर के बाहर वाले आंगन में तब अहसास होता है कि मैं रहती हूँ एक गाँव में पड़ोसी के ऊँचें घर की सबसे ऊँचीं मुँडेर पर पंख फैलाता एक मोर बैठा है एक पूरा कोना घेर कर निहार रहा है खूबसूरती को इस संध्या में डूबे गाँव के…

दोस्ती में जुदाई

मुस्कुराते, खेलते एक-दूजे को छेड़ते यूँ ही कुछ पल हमारी झोली में आ गए दिवाली के दीए थे या होली में पीए थे सब रंग हमारे आसमां पर ऐसे ही छा गए वो बर्थडे का केक चाहे Mid Sem ब्रेक सब हमारे लिए यादें बुन रहे थे थी गुंज जो हँसी की लय वो खुशी…

तेरे जाने के बाद

तू जो गया छोड़ के ये जिंदगी थम सी गई तू चला किस  ओर कि ये आँखें नम हो गई साँसें चले ना जाने कैसे बस जपती माला तेरे नाम की है ना कोई पता मेरा धड़कन हुई गुमनाम सी है याद मुझे वो हर एक पल जो रह गया मेरी रुह में बस तू…