बाबुल की बिटिया

उन नन्हें हाथों का स्पर्श आज फिर से महसूस हो रहा है उन प्यारी-सी किलकारियों की गूंज से आज दिल खुश हो रहा है मेरी नन्हीं परी का वो पहला कदम उसके छोटे से मुख से निकला वो पहला शब्द वो भारी स्कूल बैग का बोझ ना ढो पाना वो कभी बेवजह रूठना और फिर…

मेरी संगिनी

तेरे मेरे दरम्यां, ये जो रिश्ता है बना खुद रब ने हमारे बाँधी हैं ये डोरियाँ वो वचन और कसमें थी, सात जन्मों के साथ की मैं निभाऊँगां उन्हें सात जन्मों के बाद भी तू जो है साथ मेरे, ये जहाँ जन्नत से भी हसीं तू धुन है मेरे प्यार की, हमेशा मेरे दिल में…

हारे हुए हम

शमशान के मुर्दों की तरह सोए हुए हैं हम किसी नासमझ बच्चे की तरह खोए हुए हैं हम खामोशियों में भी चीखती रातों के गुलाम हर अश्क़ अब खून के रोए हुए हैं हम है गुजरती जिस तरफ से ये हवा मनचली सूखे पत्ते की तरह बस पीछे चल पड़े जहां रुख मुड़ गया इस बहती…

रात और दिन

है रात काली अँधेरी, बस सुबह के इंतज़ार में डरती है खुद से ही, पर है खुद से ही प्यार में लब्ज तलाशती है रात भर, कुछ बातें बनाने को साथी ढूंढती है रात भर, कुछ राज़ सुनाने को बटोरती है सामान ये, इस कालिख की प्यास बुझाने को मांगती है रंग नया सा, इसे रंगीन…

सच या झूठ

मैं ढूँढ़ता हूँ सच कहीं और सच कहीं और है मैं देखता हूँ तेरी परछाई कहीं, मगर अक्ष कहीं और है मैं रास्तों की दूरियों से मंजिल की कीमत नापता हूँ मेरे दिल की परेशानियों से आग मैं तापता हूँ मैं गुनगुनाता हूँ लब्ज दो, भूले पलों की याद में मैं हर दफा एक नया आसरा…

मेरे दिल की बात

मैं मुस्कुराऊँ तो समझना तुझे देख रही मेरी आँखें मैं खिलखिलाउँ तो समझना मेरी यादों में हैं तेरी यादें जब रुके ना लब मेरे, मतलब हो रहीं हैं तेरी बातें जब मैं चुपके से तुझे निहारूँ जान लेना क्या हैं मेरे इरादे जब मैं गिरने को हो जाऊँ तो चाहूँ तेरी बाहें जब उंगलियां बार-बार मेरे बालों…

गैंग्स ऑफ़ वासेपुर

अंश पल रहा है गर्भ में लोरियों की जगह गोलियों के गान हैं ना भगवद गीता, ना ही पुराण है बस मरने- मारने का प्लान है वो अभिमन्यु है ,गर्भ में ही सीख रहा है अपना आने वाला कल उसे अच्छे से दिख रहा है घड़ी आ गई जन्म की, समय आ गया जंग का…

इश्कबाज़

हर साँस के साथ तुझे जिया हर पल तुझसे ही प्यार किया बस लब्ज़ नहीं थे जताने को इसलिए हमेशा तुझे नाराज़ किया है एक दर्द सीने में, नासमझ हूँ मैं मगर है क्या मेरे दिल में, ये कैसे कहूँ मैं साथ तेरा कभी कभी चुभन दे जाता है पर तुझसे दूर भी ना रह…

जुदाई का मौसम

ये तेरा मुस्कुराता चेहरा ना जाने फिर कब देख पाएँगे ना जाने फिर कब हम बेसुरे गाने गाएँगे कब फिर से साथ चलने वाले दिन आएँगे कब सिर्फ बातों के सहारे कई मील कट जाएँगे तेरा प्यार भरा दिल मेरे पास ही छोड़ दे ए-खुदा इस वक़्त जुदाई को कहीं और मोड़ दे कुछ दिन…