मेरे खुदा

अ खुदा तू कितना खूबसूरत है कि जब सोचूँ मुस्कुरा देती हूँ , क्या रुतबा है तेरा ऐसा कि जब चाहे तेरे आगे सिर झुका देती हूँ | मेरे गुनाहों की कोई माफ़ी ना सही, मगर फिर भी सब तुझे बता देती हूँ, जानती हूँ कि तू साथ है मेरे, इसलिए हर दिन इम्तिहान नया…

बदलाव

आज हँसी आती है खुद पर कि ज़िन्दगी क्या से क्या हो गई जो कभी सब दुःख भुला देती थी दुःख देने वाली आज वही जुबाँ हो गई दो कदम अकेले न चलने वाली राहें आज खुद-ब-खुद तनहा हो गई जिससे प्यार था इस दिल को घुटन की अब वही वजह हो गई सिसकियाँ भी…

सबक सफ़र का

उन रास्तों को देख कुछ कह रहे हैं लाखों सफर पूरे किए, मगर वहीं रह रहे हैं हैं सिखाते सबक़ तुझको स्थिरता का सदा ना सोच तू परिणाम की, बस कर अपना फ़र्ज़ अदा तू साथ चल सभी के, मगर अपना अस्तित्व खो नहीं तू सीख सबसे कुछ ना कुछ, घमंड तुझमे हो नहीं हैं…

एक कविता की रचना

मैं लिखना चाहती हूँ आज, मगर क्या लिखूं कुछ समझ नहीं आता है जैसे ही कागज़ पर उतारने लगती हूँ, वो विचार का कीड़ा कहीं खो जाता है मैं ढूँढती हूँ उसे अपनी ही गहराइयों में डूब-डूब कर, मगर नाकामी नज़र आती है बहुत मेहनत के बाद भी, कविता की एक पंक्ति नहीं बन पाती…