तू एक नारी है…

एक पल्लू जो तेरे सिर से फिसल के चल दिया एक बर्फ का हिस्सा कहीं पिघल के चल दिया एक लब्ज़ जो तेरे अधरों से शोर सा निकाला एक हवा का झोंका फिर जोर से चला एक बूँद जो तेरे आँख से बरसी एक नदी यूँ सागर की प्यास में तरसी तू जान खुद को…

हम युवा

आसमाँ के परिंदे भी है हम और धरती की चट्टान भी नदी की शांत लहरें भी है और समंदर का तूफ़ान भी है आग इतनी सीने में कि जला दे जहां सारा और वही बन जाये सूरज करे हर तरफ उजियारा आसमान का आखिरी छोर न सही, ज़िंदगी की डोर तो हैं हाथ में और ये…

काश….

काश तू मुझे भूल गया होता और कहानियाँ वो सारी दफ़न हो गई होती काश तेरे दिल की गालियाँ भी बाकियों की तरह बदचलन हो गई होती काश लिखता ना लहू से तू नाम मेरा इस दुनिया की दीवारों पर होती गर रेत पे मोहब्बत तेरी तो लहरों के साथ मिलन हो गई होती खुशबू…