download-1

आसमाँ के परिंदे भी है हम और धरती की चट्टान भी
नदी की शांत लहरें भी है और समंदर का तूफ़ान भी
है आग इतनी सीने में कि जला दे जहां सारा
और वही बन जाये सूरज करे हर तरफ उजियारा
आसमान का आखिरी छोर न सही, ज़िंदगी की डोर तो हैं हाथ में
और ये रस्ते तो यूँ ही कट जायेंगे, जब हम सब यार हैं साथ में
बस एक है कसम की मंज़िल की चाह मत छोड़ना कभी
और मंज़िल को पाने खातिर गलत राह पर कदम ना मोड़ना कभी
तो रुको नहीं बस जज़्बे को साँसों में भर के चल दो
हाथ थाम लो सबका और दुनिया को बदलने निकल दो
रंग दो जहां को अपने सपनों के रंग में
है जानते हम भी कि जीतना ही होगा हमें हर जंग में

Picture taken from: gavowzy
Advertisements