हिस्सों में बँटें हुए लोग

हिस्सों में बँटें हुए लोग कभी अपनों से अपनों में कभी अपने ही सपनों में कभी रंग-रूप के पैमाने में कभी जाम, कभी मयख़ाने में हिस्सों में बँटें हुए लोग कभी बँटें दोस्ती के नाम पर कभी बिखरे है फाइलों के काम पर कभी छूटे हैं किसी और के साथ के लिए कभी भटके हैं…