एक बात

एक बात मेरे दिल में है एक बात तेरे दिल में है, बातों ही बातों में, दिल गुम हैं, हैं ख़ामोश आँखें, जुबां भी चुप हैं। जानती हैं निगाहें, बात एक ही है, कहना चाहता हूँ मैं, कहना तू भी चाहती है, अंतर है शब्दों का, अर्थ एक ही है। कुछ चाहती है जानना तू,…

जान-पहचान

सालों गुज़र गए मुझे, ‘मैं’ बने हुए, अपने नाम का बोझ लिए हुए, खुद के आस्तित्व को संभाले, अपनी ही हाँ में हाँ मिलाते, खुद से खुद की पहचान हुए, क्या मैं जान पाया अपने आप को? यद्यपि(जबकि), सालों गुज़र गए मुझे, ‘मैं’ बने हुए। क्या है मेरी मंज़िल क्यूँ हूं इतना मायुस मैं? बड़ों…

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इरादे वो नहीं हमारे जो कभी पहले हुआ करते थे आज तो कहानियाँ भी सिर्फ झूठ बोलती हैं हाथ थामते नहीं किसी और की लकीरों को मुठ्ठियाँ अब सिर्फ दूसरों के राज़ खोलती हैं तोलती है दुनिया दोस्ती में भी भावनाएँ किसी का सस्ता, किसी का महँगा मोल है मत करना भरोसा इन पास आते…