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इरादे वो नहीं हमारे जो कभी पहले हुआ करते थे
आज तो कहानियाँ भी सिर्फ झूठ बोलती हैं
हाथ थामते नहीं किसी और की लकीरों को
मुठ्ठियाँ अब सिर्फ दूसरों के राज़ खोलती हैं

तोलती है दुनिया दोस्ती में भी भावनाएँ
किसी का सस्ता, किसी का महँगा मोल है
मत करना भरोसा इन पास आते क़दमों को भी
इनकी आहट का मतलब भी टाल-मटोल है

बाँधतें नहीं धागे अब दिल के हम
किसी और की धड़कनों के तार ना जोड़ते हैं
संभल कर चलना इस राहों पर तुम भी
परायों से ज्यादा अपने ही दिल तोड़ते हैं

निचोड़ते है विश्वास को बार-बार आहत करके
जो अब और सहना छोड़ दिया हैं हमने
अब अकेले ही चलना चाहते हैं इन रास्तों पर
दूसरों के धोखों के साथ खूब जीया है हमने

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