एक बात मेरे दिल में है
एक बात तेरे दिल में है,
बातों ही बातों में, दिल गुम हैं,
हैं ख़ामोश आँखें, जुबां भी चुप हैं।
जानती हैं निगाहें, बात एक ही है,
कहना चाहता हूँ मैं, कहना तू भी चाहती है,
अंतर है शब्दों का, अर्थ एक ही है।

कुछ चाहती है जानना तू,
कुछ चाहता हूँ मैं भी जानना,
प्रश्नों के उत्तर ना सही,
पर प्रश्नों को तो कर कर दे बयां।

नम हैं जो आँखें तेरी,
हो रही भारी आवाज़ मेरी,
थमती नहीं ये साँसे,
क्यूँ होती नहीं शाम।

पिए थे एक रोज़ तेरी नशीली आंखों के जाम,
नशा आज तक है मेरे दिमाग़ पर,
डगमगाने जो लगे मेरे पाँव,
तू लेना मेरा हाथ थाम।

एक बात मेरे दिल मे थी,
हो गयी है अब वो ग़ुम कहीं,
दिल तो मेरा ही था,
अब तो वो भी मेरा नही।

तड़पती है रूह, बात अधूरी सी रह गई,
मेरे हाथों में अब एक मजबूरी ही रह गयी,
कैसे बयाँ करुं, बन कर हवा इस मजबूरी ने,
उड़ा दिया तुझे मेरे हाथों से रेत की तरह,
एक बात तो थी, पर सुनने के लिए उसे तू ही ना थी।

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