देता हूं तुझको एक उपहार,
तेरे दो कौड़ी के जज़्बात,
लोग,
उड़ाएंगे तेरा उपहास,
बदलेगा नहीं ये इतिहास,
तू रह जायेगा नदिया के इस पार,
तेरी,
नौका टूटी हुई है,
तेरी,
क़िस्मत फूटी हुई है,
तेरी तबियत अभी ठीक नहीं हुई है।
तेरा घाव अभी कच्चा है,
बेटा,
तू आज भी एक बच्चा है,
दिखावे अनेक है,
वास्तविकता का रूप ही एक सच्चा है,
अच्छा है,
ये मेरी समीक्षा है,
तुझे जो कुछ भी है मिला,
वो तो एक भिक्षा है।
तुझे मिला जो तिरस्कार है,
वही तो तेरा पुरस्कार है,
प्यार है,
उपहार है।
तुझे पूरा अधिकार है,
माँगने का,
तेरी ज़िन्दगी से तुझको
अब किसका इंतज़ार है?
बेवफ़ा ये ज़िन्दगी,
इसका तुझे खुमार है?
क्या तेरे संस्कार हैं
तुझमें अहंकार है।
आहार है,
तेरा नहीं, तेरी सोच का,
जो आकर है,
सब बेकार है!

Advertisements