स्कूल की यादें

ekbaat2
कभी रुक के याद मुझे भी कर ले
जो तुझे ख़ुशी देता था वो वक़्त हूँ मैं
नाम जो स्कूल की दीवार पर आज भी लिखा है
उस यार की यारी भरी रंगत हूँ मैं
डेस्क के बंटवारे की लाइनें याद तो होंगी ही तुझे
कभी बनाने की जल्दी थी तो कभी मिटाने की
वो girls, boys के बीच हमेशा लड़ाई
क्या सच में ज़रूरत है कुछ याद दिलाने की ?
तेरी उदासी में बेतुकी बकवास उसकी
कैसे हँसी की फुहारें ले आती थी
Class की छोटी वाली खिड़की से छेड़ना उसे
दोस्ती को कैसे धीरे धीरे बढाती थी
बीत गए वो पल कुछ यादें बनाते हुए
और ज़िंदगी की दौड़ तेरी शुरू हो गई
तू बढ़ गया आगे ज़िम्मेदारियों की तरफ
इन यादों की याद भी धुँधली हो गई
आज एक पल को ठहर कर फिर ये यादें ताज़ा कर ले
क्या पता फिर वो धुंधले निशां भी ना रहें
जैसे वक़्त की दहलीज़ को तू पार करते जा रहा है
कल को तेरे दिल में यादों का मकान भी ना रहे
Picture credits: www.jnvsgnr.com
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  1. Seema saini says:

    Nice poem my dear rite ….school ki yaadein taaja kr di😘

    Like

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