freedom
दर्द जो तूने दिया कितना गहरा उतरा सीने में
ना ख़ुशी रही ना हसीं रही तब एक पल भी जीने में
कितनी बेबसी से रोई ये आँखें, तेरे दिए जख्मों पे
कितने दूर तक चलती मैं साथ तेरे, इन थके हारे क़दमों से
रूह जो सहम सी गई थी प्यार के ही नाम से
दिल भी निकला ही नहीं तेरे दिए दर्द के इनाम से
बिखरी थी पल पल मैं यूँ, की खुद से खुद को डर था
कभी खरोंच भी दे दूँ खुदको, दिल मेरा इतना पत्थर था
खून कहाँ था ज़िस्म में, श्वास कहाँ कुछ बाकी था
ज़िंदा हूँ मैं अब भी, मुझे ये अहसास ज़रा ही था
पर अब निकली हूँ समंदर से, सब बोझ मैंने बहा दिया
टूटी बिखरी मैंने खुद का,एक नया जहां बना लिया
चाहे मैं हूँ अधूरी, पर अंदर से सिमटी हूँ
किसी और की नहीं ज़रूरत, मैं खुद के लिए कीमती हूँ
जीने का अब अहसास हो रहा है,हर पल नया खास हो रहा है
खुद को पाकर फिर से, मैं हूँ खुद में ये विश्वास हो रहा है
Pic credit: willowcreeksa.co.za

 

Advertisements