pexels-photo-207962
जिस्मों के मिलने का इंतज़ार नहीं करती मोहब्बत
रूह के धागे हाथ में आते ही परवान चढ़ जाती है
डूब कर तुझमें खुद को पा लेता हूँ जब
तब जाकर  मेरी आशिक़ी मोहब्बत कहलाती है
और जब दिल की मानकर, सिर तेरे आगे झुक जाता है
मेरी इश्क़ की हर आयत इबादत बन जाती है
तेरी पलकों से टूटे आँसूं जब मेरा दामन भिगोते हैं
उस नमीं को अपनी पलकों में संभालना मेरी आदत बन जाती है
लब खामोश जुबां गुमनाम, मगर शोर बहुत होता है
तब सिर्फ तेरी निग़ाहें मेरी निग़ाहों से बतयाती है
कानों के पास महसूस होती है एक मीठी सी सरगम
तेरी आती जाती साँसें कई दास्ताँ गुनगुनाती है
तेरी ठंडी उँगलियों की छुअन जब मेरे हाथों को जलाती है
तब तेरी मुतासिर होकर ज़िंदगी, ज़िंदगी की तरह मुस्कुराती है
Image Credit: Pexels
Advertisements