पंक्तियाँ भावनाओं से भरी।

वो चंद पंक्तियाँ मेरी भावनाओं से भरी, आज भी मेरे भीतर ज़िन्दा हैं, जो एक रोज़ मेरे लफ्जों पर आते आते रह गयी, तेरे चहरे की वो मासूम मुस्कुराहट आज भी मेरे जज़्बातों पर भारी है कोशिश की थी मैंने भी पूरी तुझको अपना बनाने की पर मेरी बदक़िस्मती अपना रंग दिखा गयी। याद है…