Happy Independence Day

वो रात याद है क्या ? नहीं किसी को भी नहीं जो आज़ादी के बाद आए, कम से कम उनको तो नहीं वो रात जिसकी सुबह कभी हुई नहीं वो रात जिसकी काली स्याही कभी मिटी नहीं वो रात जो गम और खुशियाँ एक साथ लाई थी वो रात जो उस दर्द में खुद भी…

बंजारा

एक सुनसान से घर में एक तकिया और चादर के साथ रहता हूँ कोई नहीं होता आस पास लोगों के सिर्फ जिस्म इधर उधर घूमते नज़र आते हैं परछाइयाँ भी हैं उनकी लेकिन बात नहीं करती रोज उस तकिये को पकड़ कर चादर में लिपट कर अपने अंदर बैठे अकेलेपन से बात करने की कोशिश…

सुनो, मैं यहीं रहूँगी…..

सुनो, मैं यहीं रहूँगी तुम जब मुड़कर देखोगे यहीं, मुस्कुराती हुई तुम्हारे जाने का गम छुपाती हुई मगर, तुम बस मुड़कर देखना वापस नहीं आना जो तुम पाने जा रहे हो वो छोड़कर नहीं आना कोई बात नहीं, जब थक जाओगे तो महसूस करना, मैं वहीँ होऊंगी साथ लिए हमारी हंसी की किलकारियाँ कोई बात…

सच

सच क्या है? वो जो हमें दिखाई देता है? नहीं! तो फिर वो जो हम अपने कानों से सुनते हैं? नहीं! सच एक अहसास है जो हमारा दिल महसूस करता है एक भरोसा है वो जो हमारा दिमाग दूसरों पर करता है एक ख्वाब है जो झूठ को भी सच बनाता है एक रिश्ता है…