नमक वाली शिकंजी

मैंने पूछा, मीठा या नमकीन? ना जाने क्यूँ,वो पहले मुस्कुराई एक बार मेरी तरफ देखा और एक बार शिकंजी बेचने वाले भैया की तरफ फिर मुस्कुराती हुई बोली – भैया नमक वाला उसकी मुस्कराहट का सुकून दिल तक पहुँचा लगा जैसे किसी को कई अरसे बाद खुश देखा है “भैया दो गिलास शिकंजी – नमक…

दोस्ती से प्यार तक

जानती थी उसे कई दिनों से, या यूँ कहूं कई महीनों से, सालों से उसके जवाबों से, उसके सवालों से खाना नहीं सिर्फ, हमने यादों बांटीं थी साथ ज़िंदगी के अच्छे-बुरे सब हिस्से सारी काली, रंग-बिरंगी रातें काटीं थी नमीं से भरी आँखों में, आसूंओं का रंग पहचाना था दुःख के थे या हंसी के,…