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जानती थी उसे कई दिनों से,
या यूँ कहूं कई महीनों से, सालों से
उसके जवाबों से, उसके सवालों से
खाना नहीं सिर्फ, हमने यादों बांटीं थी
साथ ज़िंदगी के अच्छे-बुरे सब हिस्से
सारी काली, रंग-बिरंगी रातें काटीं थी
नमीं से भरी आँखों में, आसूंओं का रंग पहचाना था
दुःख के थे या हंसी के, या सच छिपाने का बहाना था
हमारी रूहें हमसे ज्यादा, एक दूसरे को पहचानती थी
हाँ, मैं उसे कई सालों से जानती थी

मगर उस दिन, वो एक गहरी मुस्कराहट साथ लेकर आया था
लब खोलने से पहले थोड़ा हिचकिचाया था
मेरी नज़रों से नजरें मिलाई, धीरे से मेरा नाम लिया
और मेरी बची हुई ज़िंदगी का आधा हिस्सा मांग लिया
मैं सहम गई थी थोड़ी, धड़कनें एक पल को रूक सी गई थी
हाँ, मैंने सोचा था ऐसा बहुत बार, मगर ये अनुभूति नई थी
दिल गिटार बजा रहा था, लब खुद-ब-खुद मुस्कुरा रहे थे
दिमाग सुन्न था, आँखों के सामने भविष्य के मंजर मंडरा रहे थे
पेट में तितलियाँ, नसों में तेज लहू, कान कुछ सुन नहीं पा रहे थे
और बेखबर गर्दन हिलाकर, मेरा दिल हामी भर गया
उस दिन हमारी दोस्ती का रिश्ता प्यार में बदल गया

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