2870766148_9136a77486_b

मैंने पूछा, मीठा या नमकीन?
ना जाने क्यूँ,वो पहले मुस्कुराई
एक बार मेरी तरफ देखा और
एक बार शिकंजी बेचने वाले भैया की तरफ
फिर मुस्कुराती हुई बोली – भैया नमक वाला
उसकी मुस्कराहट का सुकून दिल तक पहुँचा
लगा जैसे किसी को कई अरसे बाद खुश देखा है
“भैया दो गिलास शिकंजी – नमक वाली”
मैंने उसकी बात पूरी की
उन्होंने पहला गिलास दिया,
जो मैंने उस बच्ची को थमा दिया
और दूसरे गिलास में मैं पीने लगी
उसने शिकंजी ख़त्म की, गिलास मुझे थमाया
और भाग गई
उसके छोटे-छोटे हाथ-पैर,
गर्द से सने बालों की उलझी हुई चोटी
मैं देखती रही उसे और सोचती रही
कि कैसे बचपन गरीबी का सबक सिख रहा है
वो आँखों से ओझल हुई, मेरे विचार थोड़े धुँधले हुए
मुझे उसका थमाया हुआ गिलास याद आया
गिलास को मैंने काउंटर पर रखा तो ध्यान गया
एक लाईन थी गिलास के एक सिरे पर
जैसे काँच में दरार आने पर बनती है
शिकंजी वाले भैया ने गिलास धोया
और दूसरी तरफ रखते हुए बाकि ग्राहकों को देखने लगा
मैं अपने और बाकि सब के गिलासों को देख रही थी
और अपनी शिकंजी ख़त्म करने की कोशिश कर रही थी
समाज का शायद सबसे कड़वा सच पीया मैंने
उस शिकंजी वाले के दिए हुए गिलास में

Image Credit: flickr
Advertisements