red-scribble-heart

ये दोस्ती की गज़लें प्यार के गीत ना गुनगुनाएं तो कहना
जो तेरा दामन भी मेरे रंग में ना रंग जाए तो कहना
इश्क़ की सब कहानियाँ दर्द के साथ खत्म हो ज़रूरी नहीं
ये किस्सा तुम्हारी ज़िंदगी में फिर प्यार ना भर जाए तो कहना

कभी तो मुस्कुराया करो दिल खोल कर
क्यूँ हंसी हमेशा होठों में कहीं दबी-दबी रहती है
तुम्हारे शब्द जिस इज़हार से इंकार करते हैं
वो सच तुम्हारी आँखे हमेशा कहती हैं

ये आँखें बताती हैं मुझे जो तुम पर बीता
पलकों के नीचे छिपी बारिश का एहसास है मुझे
मगर कभी तो मेरे कन्धों का सहारा लेकर देखो
तुम्हारी आँखों से निकला हर आँसू खास है मुझे
रोज कोशिश करता हूँ उसे ढूँढ़ने की
जो खो गया, तेरे उस अंश की तलाश है मुझे

और जब मैं पा लूँगा, मिलाऊँगा तुम्हें खुद से
कि जानो तुम ज़िंदगी हसीन कितनी है
कि तुम्हें प्यार हो जाए खुद से फिर
इस पल मेरी बस ख़्वाहिश इतनी है

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