चल आज धूम मचाते हैं

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चल आज धूम मचाते हैं, फिर से आज पुराने यारों को घर बुलाते हैं।
कही खो से गए हैं सब के सब, आज फिर उन बिछड़े पंछियों को दोबारा मिलाते हैं।
न जाने कहा उड़ रहे होंगे वो, जो कल एक साथ फड़फड़ाया करते थे,
कल तक जिनका घर पर ताँता लगा रहता था,
कल तक जिनके बिना एक दिन भी गवारा न था,
आज उनके बिना ही जिये जा रहे हैं।

चले गए वो भी काफी दूर अपनी मंज़िलों की तलाश में,
हम भी उनके रास्तों का आचरण किये जा रहे हैं,
ज़िंदगी के इस छोर पर आकर एहसास होता है कभी-कभी,
हम भी उन जिगरी यारोँ से जैसे काफी दूर आ गए हैं,
उनके बिना इस ज़िंदगी में कोई रंग बचा ही नहीं।
सूनी सी ज़िंदगी, भाग भाग के थक जाएं तो, थोड़ा सुस्ता लेते हैं,
WhatsApp पर message करके बतिया लेते हैं।

सुनने में आया है, आप बहाने बड़े अच्छे बना लेते हैं,
अरे! अजनबियों को छोड़िए, दोस्तों से पीछा छुड़ा लेते हैं?
हम भी कुछ कम सनकी नहीं भाईसाहब,
आप ना आइयेगा, हम आपके घर पूरी पल्टन ले आते हैं।

मान भी जा यार एक रोज़ मिल ही लेते हैं,
उन पुराने किस्सों पर फिर थोड़ा खिलखिला लेते हैं
चलो आज दूरियां मिटाने का सिलसिला चलाते हैं,
कुछ को तुम लाओ कुछ को हम लाते हैं,
और जो ना आए, उनको घसीटते हुए लाते हैं,
चल आज फिर धूम मचाते हैं, उन बेजान पंछियों की जान में जान लाते हैं।

Pic Credit: Free photo library by pexels.

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