लड़ाइयाँ

कुछ लड़ाइयाँ तुम्हें खुद ही लड़नी होती हैं, तुम्हारे भीतर जो बवंडर है उसे संभाल कर रखना, काम आएगा साँस के साथ, अगर हो सके तो शांति का घूँट पी लेना ना चाहते हुए हाथ गुस्से का जाम आएगा मगर तुम पीना नहीं क्योंकि वो छलावा है ये संसार के रिश्ते एक दिखावा है जो…

भिंडी की सब्जी

भिंडी की सब्जी मुझे बहुत पसंद है माँ हमेशा कहती है भिंडी को धोकर फिर अच्छी तरह पोंछ कर तब काटना चाहिए चाकू पर चिपचिपाहट नहीं रहती आज कई महीनो बाद घर आई तो माँ ने कहा भिंडी बनाती हूँ तेरे लिए और लाकर रख दी मेरे सामने पानी में डाली हुई भिंडी बड़ी शिद्दत…

Happy Birth Day Mommy!!

माँ एक शब्द नहीं, गहरा विचार है तेरा हिस्सा हैं हम तू हमारा पूरा संसार है जितना आपने कर दिया हमारे लिए उतना हम कभी कर नहीं पाएंगे पर जब तक सांस है शरीर में आपके लिए कुछ करते ही जाएंगे बाकी कोई गारंटी नहीं पर आपके अच्छे बच्चे बनकर दिखाएंगे आज जो हैं हम…

Gully Boy

हर सांस में हुक्का खींचू मैं तुम साथ मेरे ना सांस खींचना बस ख़ामोशी को गले लगाकर जब चाहे तुम चीखना मैं उँगलियाँ फिराऊँ जहाँ फूल भी राख बन जाते तुम फिर से लगना काम पर उस राख से पेड़ सींचना तू आ मेरे साथ चल या यहीं मेरा हाथ छोड़ दे मैं आर या…

मिलन

ज़िंदगी इतनी खूबसूरती से लिखी ना गई होती हमारी अगर एक पन्ना तुम्हारे नाम ना होता किस्से ना होते इतने मशहूर इस नाचीज के अगर नशा करने के लिए आपने पिलाया जाम ना होता यूँ ही फिरते दर-बदर बिना मंजिल की समझ के कि तुम्हारा साथ मिलना हमें, आसान ना होता साँसों ने छोड़ दिया…

ना का मतलब… ना

मैं दामन थामे बैठी हूँया चोली बिछाए बैठी हूँमैं महलों के चौबारों में हूँया कोटों पर आशियाना लुटाए बैठी हूँना लिखना किस्से जिस्म पर मेरेगर मैं ना कहाए बैठी हूँ मैं बिक कर आई साथ तेरेया तेरे संग ब्याहे बैठी हूँमैं कल की नई नवेली हूँया दशकों पहले आए बैठी हूँना लिखना किस्से जिस्म पर…

दूसरा मौका

ये दोस्ती की गज़लें प्यार के गीत ना गुनगुनाएं तो कहना जो तेरा दामन भी मेरे रंग में ना रंग जाए तो कहना इश्क़ की सब कहानियाँ दर्द के साथ खत्म हो ज़रूरी नहीं ये किस्सा तुम्हारी ज़िंदगी में फिर प्यार ना भर जाए तो कहना कभी तो मुस्कुराया करो दिल खोल कर क्यूँ हंसी…

कैदी

कहो कुछ तो ऐसा कि सुकून मिल जाए मेरे सोए हुए सपनों को जूनून मिल जाए याद दिलाओ मुझे फिर से, वो बहादुरी के किस्से मेरी सूख चुकी रगों को फिर खून मिल जाए वो वक़्त कहीं पास ही छूटा, जहां हौसला मजबूत था जहां मेरे शब्दों का अर्थ और मेरा एक वजूद था बस…

नमक वाली शिकंजी

मैंने पूछा, मीठा या नमकीन? ना जाने क्यूँ,वो पहले मुस्कुराई एक बार मेरी तरफ देखा और एक बार शिकंजी बेचने वाले भैया की तरफ फिर मुस्कुराती हुई बोली – भैया नमक वाला उसकी मुस्कराहट का सुकून दिल तक पहुँचा लगा जैसे किसी को कई अरसे बाद खुश देखा है “भैया दो गिलास शिकंजी – नमक…

दोस्ती से प्यार तक

जानती थी उसे कई दिनों से, या यूँ कहूं कई महीनों से, सालों से उसके जवाबों से, उसके सवालों से खाना नहीं सिर्फ, हमने यादों बांटीं थी साथ ज़िंदगी के अच्छे-बुरे सब हिस्से सारी काली, रंग-बिरंगी रातें काटीं थी नमीं से भरी आँखों में, आसूंओं का रंग पहचाना था दुःख के थे या हंसी के,…