माँ

माँ, हम तो हैं बच्चे तेरे,
अक्ल के कच्चे थोड़े
दिल के हैं सच्चे बड़े
सर मुसीबत जो आन पड़े
सब से तू फिर लड़ पड़े
हम तो हैं बच्चे तेरे
हमारे ही लिए तू यह सब करे
तेरे लिए यह शब्द मेरे
विकल्प हो जो पास मेरे,
छू के मैं ये पग तेरे,
जी लू सारे लम्हें मेरे।
साये में तेरे हम पले,
साया ही तेरा हम बने,
संग रहें हम बस तेरे,
दुआएं रब से यह करें
माँ, हम तो हैं बच्चे तेरे

याद होगा तुझे जीती थी जब मैं,
जीताया था मुझे बस तेरी ही लगन ने।
जीती हूँ जब भी,
जीत बड़ी हो या छोटी,
तू ही थी मेरी सफलता की कुँजी,
जाता है श्रेय तुझको,
तू जो हमेशा मेरे साथ है होती।

माँ तेरी हर बात दिल छू जाती है,
एक प्यारी सी मुस्कान जो तेरे चेहरे पर आती है,
हमारी तो दुनिया में जैसे बहार आ जाती है।
जैसे ही तेरा हाथ सर पर पड़ता है,
मेरी दुनिया रंगीन हो जाती है।
तू जो राह दिखाती है,
मंज़िले आसान हो जातीं हैं,
इस ज़िंदगी में माँ, तेरी भूमिकाएं बहुत हैं,
हम पर तेरे एहसान बहुत है,
कोई जो पूछे मुझसे मेरी पहचान,
मेरी माँ का नाम बहुत है।

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पंक्तियाँ भावनाओं से भरी।

वो चंद पंक्तियाँ मेरी भावनाओं से भरी,
आज भी मेरे भीतर ज़िन्दा हैं,
जो एक रोज़ मेरे लफ्जों पर आते आते रह गयी,
तेरे चहरे की वो मासूम मुस्कुराहट
आज भी मेरे जज़्बातों पर भारी है
कोशिश की थी मैंने भी पूरी
तुझको अपना बनाने की
पर मेरी बदक़िस्मती अपना रंग दिखा गयी।
याद है मुझे तेरा दबे पांव आना
कभी मेरे पीछे छिप जाना
तो कभी कभी छिप के सताना।
दोष तो तेरा भी नहीं जो तुझको बोल पाता
तितली थी पकड़ी मैंने
आख़िर कब तक
उन मासूम पंखों को
अपनी उंगलियों में दबोच पाता।
रेत की तरह निकली हाथों से,
रह गयी मेरी बातों में,
मेरे कमजोर जज़्बातों में,
कर भी क्या पाता,
उन बेबस हालातों में।
मेरी ज़िन्दगी की कहानी में
एक ज़िक्र तेरा भी होगा
शुरुआत तेरे बगैर थी
अंत भी तेरे बगैर ही होगा।
लेकर तेरा नाम,
मेरी हर एक शाम,
हर एक सांस में,
ये मेरा इश्क़ ज़िंदा है,
वो चंद पंक्तियाँ मेरी भावनाओं से भरी,
आज भी मेरे भीतर ज़िन्दा हैं।

कविता ही क्यूँ!?

कविता ही क्यूँ,
उसने मुझसे पूछा,
और भी तो तरीके हैं – इज़हार करने के,
क्या ज़वाब देता, तेरी खूबसूरती के आगे,
सब फ़ीके हैं!?
और फिर कविता का पर्याय तेरा नाम ही तो याद आता है,
एक पंक्ति होती नहीं पूरी कि,
तेरा ख्याल दूसरी ले आता है।
एक मायाजाल तेरी नज़रों का,
मुझे डुबोता चला जाता है,
तेरे चेहरे की हर मुस्कुराहट,
मेरे इज़हार-ऐ-इश्क़ का सबूत है,
तुझसे की हर बेपरवाही का,
मेरी कविताओं को गुरूर है,
जवाबदेही भी उनकी, मेरा क्या क़सूर है?
कविता ही क्यूँ? अरे! यही तो मेरी मोहब्बत का सबूत है!

उपहार

देता हूं तुझको एक उपहार,
तेरे दो कौड़ी के जज़्बात,
लोग,
उड़ाएंगे तेरा उपहास,
बदलेगा नहीं ये इतिहास,
तू रह जायेगा नदिया के इस पार,
तेरी,
नौका टूटी हुई है,
तेरी,
क़िस्मत फूटी हुई है,
तेरी तबियत अभी ठीक नहीं हुई है।
तेरा घाव अभी कच्चा है,
बेटा,
तू आज भी एक बच्चा है,
दिखावे अनेक है,
वास्तविकता का रूप ही एक सच्चा है,
अच्छा है,
ये मेरी समीक्षा है,
तुझे जो कुछ भी है मिला,
वो तो एक भिक्षा है।
तुझे मिला जो तिरस्कार है,
वही तो तेरा पुरस्कार है,
प्यार है,
उपहार है।
तुझे पूरा अधिकार है,
माँगने का,
तेरी ज़िन्दगी से तुझको
अब किसका इंतज़ार है?
बेवफ़ा ये ज़िन्दगी,
इसका तुझे खुमार है?
क्या तेरे संस्कार हैं
तुझमें अहंकार है।
आहार है,
तेरा नहीं, तेरी सोच का,
जो आकर है,
सब बेकार है!

क़त्ल

तेरी सोच, हिम्मत, तेरा जोश।
तेरी सोच, हिम्मत, तेरा जोश।
होंगे कई क़त्ल, उड़ेंगे तेरे होश।
होंगे कई क़त्ल, उड़ेंगे तेरे होश।

एक दिन, एक दिन,
एक दिन वो ऐसा आएगा,
सब कुछ भूलता आया था,
तब भूल कुछ नहीं पायेगा,
काली रात कट जायेगी,
सूरज सर चढ़ आएगा,
पारा बढ़ जाएगा,
क्रोध तेरे अंदर का,
तुझको है जलाएगा,
तू जागना तब चाहेगा,
पर जाग नहीं पायेगा,
अकेला, था तू पहले,
अकेला ही रह जायेगा।
ज़िन्दगी का नाम देकर,
सबको खुश कर जाएगा
सबका दिल दहल जाएगा,

क़त्ल,

क़त्ल, होगा तेरे जज़्बातों का,
तेरी आशाओं का,
बचा कर रखना,
क़त्ल होगा तेरी भावनाओं का,
परखने का, सोचने का,
अब समय नहीं विरोध करने का।
ऊपर वाले का,
न होगा सर पर हाथ,
तेरी आस, होगी जैसे सूखी घास,
तेरा विश्वास, लगेगी इसमें आग!
एक क़त्ल हुआ आज,
अनेक हैं, आज के बाद,
टेढ़ी नहीं, सीधी-सी थी ये बात,
थी तेरी सोच,
तेरी हिम्मत, तेरा जोश,
होंगे क़त्ल, अब उड़ेगा तेरा होश!!
थी तेरी सोच,
तेरी हिम्मत, तेरा जोश,
होंगे क़त्ल, अब उड़ेगा तेरा होश!!

 

एक बात

एक बात मेरे दिल में है
एक बात तेरे दिल में है,
बातों ही बातों में, दिल गुम हैं,
हैं ख़ामोश आँखें, जुबां भी चुप हैं।
जानती हैं निगाहें, बात एक ही है,
कहना चाहता हूँ मैं, कहना तू भी चाहती है,
अंतर है शब्दों का, अर्थ एक ही है।

कुछ चाहती है जानना तू,
कुछ चाहता हूँ मैं भी जानना,
प्रश्नों के उत्तर ना सही,
पर प्रश्नों को तो कर कर दे बयां।

नम हैं जो आँखें तेरी,
हो रही भारी आवाज़ मेरी,
थमती नहीं ये साँसे,
क्यूँ होती नहीं शाम।

पिए थे एक रोज़ तेरी नशीली आंखों के जाम,
नशा आज तक है मेरे दिमाग़ पर,
डगमगाने जो लगे मेरे पाँव,
तू लेना मेरा हाथ थाम।

एक बात मेरे दिल मे थी,
हो गयी है अब वो ग़ुम कहीं,
दिल तो मेरा ही था,
अब तो वो भी मेरा नही।

तड़पती है रूह, बात अधूरी सी रह गई,
मेरे हाथों में अब एक मजबूरी ही रह गयी,
कैसे बयाँ करुं, बन कर हवा इस मजबूरी ने,
उड़ा दिया तुझे मेरे हाथों से रेत की तरह,
एक बात तो थी, पर सुनने के लिए उसे तू ही ना थी।

जान-पहचान

सालों गुज़र गए मुझे, ‘मैं’ बने हुए,
अपने नाम का बोझ लिए हुए,
खुद के आस्तित्व को संभाले,
अपनी ही हाँ में हाँ मिलाते,
खुद से खुद की पहचान हुए,
क्या मैं जान पाया अपने आप को?
यद्यपि(जबकि), सालों गुज़र गए मुझे, ‘मैं’ बने हुए।

क्या है मेरी मंज़िल
क्यूँ हूं इतना मायुस मैं?
बड़ों की सीख लिए साथ में
चलता जा रहा हूं,
अपनी मंज़िल की तलाश में।
क्या है मेरे जन्म का प्रयोजन
मैं करुँ गहन चिंतन मनन,
बस चल रहा हूं अपना ही हाथ अपने हाथ मे थमाये हुए,
आशाएं अपने दिल में समाए हुए,
सालों गुज़र गए मुझे, ‘मैं’ बने हुए।

कौन हूं मैं,
मेरा मकसद क्या है?
यह तो बस मामूली प्रश्न है,
असल प्रश्न तो यह है,
की यह जिज्ञासा कहाँ से आई है।
थक गया हूं, दिलोदिमाग से लड़ते हुए,
सालों गुज़र गए मुझे, ‘मैं’ बने हुए।

 

इंतज़ार है किसी का

manwaiting

 

इंतज़ार है किसी का
आने की है आस किसी की,
आँखों के आगे चेहरा किसी का
दिल में है एक प्यास किसी की।
शांति में ये शोर कैसा?
शोर में है शांति,
मेरे जीवन में था वो भोर कैसा
आयी है कैसी शाम भी?।

मैं जो उसको पढूँ,
जागे मेरे अंदर का जुनूँ,
निकल गयी मेरे हाथों से रेत की भाँति,
रेत कब है, किसी की मुठ्ठी में टिक पाती।
सागर बन तुझको संचित करता खुदमे,
चारों ओर मेरे दुनिया होती,
और अपनी दुनिया पाता तुझमें।

भीनी-भीनी सी ख़ुशबू उसकी,
आंसुओं से तर आँखें,
दिल ये मेरा मजनूँ उसके पीछे,
दिमाग़ ने बनायीं सराखें।
दिन-रात का अंतर ना जताता
जब होता मन उससे बतियाता,
उसको, सर-आँखों पर बिठाता,
काश! के उस रोज़,
मैं तुझको रोक पाता।

अतीत की काली गुफ़ा से,
एक सुनहरी रौशनी, बाहर को आये,
बातों ही बातों में, जो तेरा ज़िक्र आये,
इतिहास के पन्ने खुद को,
पढ़ने लग जाएं,
फिर सोचूं मैं आंखें खोल,
क्यूं न उन हसीन लम्हों को
एक बार फिर जिया जाए।
इस दिल को फिर कौन समझाए,
क्यों, बीता हुआ पल कभी लौट कर ना आये।

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Fairytale of life

I want to be drunk, I want to be sober,
I want to be rich, I want to be poor,
I want to do a job, I want to be an entrepreneur,
I want to eat a lot, I want to have a hunger,

I want to be a thief, I want to be a king,
I want to be an assassin, I want to be a saviour,
I want to be sweet, I want to be bitter,
I want to be handsome, I want to be ugly,

Life’s a game and it’s really deadly!
I want to be authorised, I want to be ostracized,
’cause my dear friend, in life’s fairytale,

Nothing is true and everything is permitted!

शिकायतें बहुत हैं ज़िंदगी से।

news24online.com

 

शिकायतें बहुत हैं ज़िंदगी से,
बस मिलता नहीं तो कोई सुनने वाला,
उलझने बहुत हैं ज़िंदगी में,
बस मिलता नही तो कोई सुलझाने वाला।
चोट देने वाले तो बहुत हैं इस दुनिया में,
बस नहीं है तो मरहम लगाने वाला,
वादे करने वाले बहुत हैं,
नहीं है तो वादे निभाने वाला।
जान निकालने वाले तो बहुत हैं,
बस नहीं है तो जान डालने वाला,
आखिर क्यूँ न हों मुझे शिकायतें?!
शिकायतें ही होंगी उस समाज में, जहां होगा,
द्वेष और स्वार्थ का बोलबाला।
बोलना सिखा कर, आवाज़ दबा दी,
चलना सिखा कर, बेड़ियाँ लगा दी,
क्यूँ अब मुझको मिलती नहीं शांति,
समाज में फैली है ये जो भ्रान्ति,
शिकायत है मुझे आखिर आती क्यों नही कोई क्रांति?!

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