इश्क़

जिस्मों के मिलने का इंतज़ार नहीं करती मोहब्बत
रूह के धागे हाथ में आते ही परवान चढ़ जाती है
डूब कर तुझमें खुद को पा लेता हूँ जब
तब जाकर  मेरी आशिक़ी मोहब्बत कहलाती है
और जब दिल की मानकर, सिर तेरे आगे झुक जाता है
मेरी इश्क़ की हर आयत इबादत बन जाती है
तेरी पलकों से टूटे आँसूं जब मेरा दामन भिगोते हैं
उस नमीं को अपनी पलकों में संभालना मेरी आदत बन जाती है
लब खामोश जुबां गुमनाम, मगर शोर बहुत होता है
तब सिर्फ तेरी निग़ाहें मेरी निग़ाहों से बतयाती है
कानों के पास महसूस होती है एक मीठी सी सरगम
तेरी आती जाती साँसें कई दास्ताँ गुनगुनाती है
तेरी ठंडी उँगलियों की छुअन जब मेरे हाथों को जलाती है
तब तेरी मुतासिर होकर ज़िंदगी, ज़िंदगी की तरह मुस्कुराती है
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स्कूल की यादें

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कभी रुक के याद मुझे भी कर ले
जो तुझे ख़ुशी देता था वो वक़्त हूँ मैं
नाम जो स्कूल की दीवार पर आज भी लिखा है
उस यार की यारी भरी रंगत हूँ मैं
डेस्क के बंटवारे की लाइनें याद तो होंगी ही तुझे
कभी बनाने की जल्दी थी तो कभी मिटाने की
वो girls, boys के बीच हमेशा लड़ाई
क्या सच में ज़रूरत है कुछ याद दिलाने की ?
तेरी उदासी में बेतुकी बकवास उसकी
कैसे हँसी की फुहारें ले आती थी
Class की छोटी वाली खिड़की से छेड़ना उसे
दोस्ती को कैसे धीरे धीरे बढाती थी
बीत गए वो पल कुछ यादें बनाते हुए
और ज़िंदगी की दौड़ तेरी शुरू हो गई
तू बढ़ गया आगे ज़िम्मेदारियों की तरफ
इन यादों की याद भी धुँधली हो गई
आज एक पल को ठहर कर फिर ये यादें ताज़ा कर ले
क्या पता फिर वो धुंधले निशां भी ना रहें
जैसे वक़्त की दहलीज़ को तू पार करते जा रहा है
कल को तेरे दिल में यादों का मकान भी ना रहे
Picture credits: www.jnvsgnr.com

उपहार

देता हूं तुझको एक उपहार,
तेरे दो कौड़ी के जज़्बात,
लोग,
उड़ाएंगे तेरा उपहास,
बदलेगा नहीं ये इतिहास,
तू रह जायेगा नदिया के इस पार,
तेरी,
नौका टूटी हुई है,
तेरी,
क़िस्मत फूटी हुई है,
तेरी तबियत अभी ठीक नहीं हुई है।
तेरा घाव अभी कच्चा है,
बेटा,
तू आज भी एक बच्चा है,
दिखावे अनेक है,
वास्तविकता का रूप ही एक सच्चा है,
अच्छा है,
ये मेरी समीक्षा है,
तुझे जो कुछ भी है मिला,
वो तो एक भिक्षा है।
तुझे मिला जो तिरस्कार है,
वही तो तेरा पुरस्कार है,
प्यार है,
उपहार है।
तुझे पूरा अधिकार है,
माँगने का,
तेरी ज़िन्दगी से तुझको
अब किसका इंतज़ार है?
बेवफ़ा ये ज़िन्दगी,
इसका तुझे खुमार है?
क्या तेरे संस्कार हैं
तुझमें अहंकार है।
आहार है,
तेरा नहीं, तेरी सोच का,
जो आकर है,
सब बेकार है!

क़त्ल

तेरी सोच, हिम्मत, तेरा जोश।
तेरी सोच, हिम्मत, तेरा जोश।
होंगे कई क़त्ल, उड़ेंगे तेरे होश।
होंगे कई क़त्ल, उड़ेंगे तेरे होश।

एक दिन, एक दिन,
एक दिन वो ऐसा आएगा,
सब कुछ भूलता आया था,
तब भूल कुछ नहीं पायेगा,
काली रात कट जायेगी,
सूरज सर चढ़ आएगा,
पारा बढ़ जाएगा,
क्रोध तेरे अंदर का,
तुझको है जलाएगा,
तू जागना तब चाहेगा,
पर जाग नहीं पायेगा,
अकेला, था तू पहले,
अकेला ही रह जायेगा।
ज़िन्दगी का नाम देकर,
सबको खुश कर जाएगा
सबका दिल दहल जाएगा,

क़त्ल,

क़त्ल, होगा तेरे जज़्बातों का,
तेरी आशाओं का,
बचा कर रखना,
क़त्ल होगा तेरी भावनाओं का,
परखने का, सोचने का,
अब समय नहीं विरोध करने का।
ऊपर वाले का,
न होगा सर पर हाथ,
तेरी आस, होगी जैसे सूखी घास,
तेरा विश्वास, लगेगी इसमें आग!
एक क़त्ल हुआ आज,
अनेक हैं, आज के बाद,
टेढ़ी नहीं, सीधी-सी थी ये बात,
थी तेरी सोच,
तेरी हिम्मत, तेरा जोश,
होंगे क़त्ल, अब उड़ेगा तेरा होश!!
थी तेरी सोच,
तेरी हिम्मत, तेरा जोश,
होंगे क़त्ल, अब उड़ेगा तेरा होश!!

 

एक बात

एक बात मेरे दिल में है
एक बात तेरे दिल में है,
बातों ही बातों में, दिल गुम हैं,
हैं ख़ामोश आँखें, जुबां भी चुप हैं।
जानती हैं निगाहें, बात एक ही है,
कहना चाहता हूँ मैं, कहना तू भी चाहती है,
अंतर है शब्दों का, अर्थ एक ही है।

कुछ चाहती है जानना तू,
कुछ चाहता हूँ मैं भी जानना,
प्रश्नों के उत्तर ना सही,
पर प्रश्नों को तो कर कर दे बयां।

नम हैं जो आँखें तेरी,
हो रही भारी आवाज़ मेरी,
थमती नहीं ये साँसे,
क्यूँ होती नहीं शाम।

पिए थे एक रोज़ तेरी नशीली आंखों के जाम,
नशा आज तक है मेरे दिमाग़ पर,
डगमगाने जो लगे मेरे पाँव,
तू लेना मेरा हाथ थाम।

एक बात मेरे दिल मे थी,
हो गयी है अब वो ग़ुम कहीं,
दिल तो मेरा ही था,
अब तो वो भी मेरा नही।

तड़पती है रूह, बात अधूरी सी रह गई,
मेरे हाथों में अब एक मजबूरी ही रह गयी,
कैसे बयाँ करुं, बन कर हवा इस मजबूरी ने,
उड़ा दिया तुझे मेरे हाथों से रेत की तरह,
एक बात तो थी, पर सुनने के लिए उसे तू ही ना थी।

जान-पहचान

सालों गुज़र गए मुझे, ‘मैं’ बने हुए,
अपने नाम का बोझ लिए हुए,
खुद के आस्तित्व को संभाले,
अपनी ही हाँ में हाँ मिलाते,
खुद से खुद की पहचान हुए,
क्या मैं जान पाया अपने आप को?
यद्यपि(जबकि), सालों गुज़र गए मुझे, ‘मैं’ बने हुए।

क्या है मेरी मंज़िल
क्यूँ हूं इतना मायुस मैं?
बड़ों की सीख लिए साथ में
चलता जा रहा हूं,
अपनी मंज़िल की तलाश में।
क्या है मेरे जन्म का प्रयोजन
मैं करुँ गहन चिंतन मनन,
बस चल रहा हूं अपना ही हाथ अपने हाथ मे थमाये हुए,
आशाएं अपने दिल में समाए हुए,
सालों गुज़र गए मुझे, ‘मैं’ बने हुए।

कौन हूं मैं,
मेरा मकसद क्या है?
यह तो बस मामूली प्रश्न है,
असल प्रश्न तो यह है,
की यह जिज्ञासा कहाँ से आई है।
थक गया हूं, दिलोदिमाग से लड़ते हुए,
सालों गुज़र गए मुझे, ‘मैं’ बने हुए।

 

Untitled

इरादे वो नहीं हमारे जो कभी पहले हुआ करते थे
आज तो कहानियाँ भी सिर्फ झूठ बोलती हैं
हाथ थामते नहीं किसी और की लकीरों को
मुठ्ठियाँ अब सिर्फ दूसरों के राज़ खोलती हैं

तोलती है दुनिया दोस्ती में भी भावनाएँ
किसी का सस्ता, किसी का महँगा मोल है
मत करना भरोसा इन पास आते क़दमों का भी
इनकी आहट का मतलब भी टाल-मटोल है

बाँधतें नहीं धागे अब दिल के हम
किसी और की धड़कनों के तार ना जोड़ते हैं
संभल कर चलना इस राहों पर तुम भी
परायों से ज्यादा अपने ही दिल तोड़ते हैं

निचोड़ते है विश्वास को बार-बार आहत करके
जो अब और सहना छोड़ दिया हैं हमने
अब अकेले ही चलना चाहते हैं इन रास्तों पर
दूसरों के धोखों के साथ खूब जीया है हमने

इंतज़ार है किसी का

manwaiting

 

इंतज़ार है किसी का
आने की है आस किसी की,
आँखों के आगे चेहरा किसी का
दिल में है एक प्यास किसी की।
शांति में ये शोर कैसा?
शोर में है शांति,
मेरे जीवन में था वो भोर कैसा
आयी है कैसी शाम भी?।

मैं जो उसको पढूँ,
जागे मेरे अंदर का जुनूँ,
निकल गयी मेरे हाथों से रेत की भाँति,
रेत कब है, किसी की मुठ्ठी में टिक पाती।
सागर बन तुझको संचित करता खुदमे,
चारों ओर मेरे दुनिया होती,
और अपनी दुनिया पाता तुझमें।

भीनी-भीनी सी ख़ुशबू उसकी,
आंसुओं से तर आँखें,
दिल ये मेरा मजनूँ उसके पीछे,
दिमाग़ ने बनायीं सराखें।
दिन-रात का अंतर ना जताता
जब होता मन उससे बतियाता,
उसको, सर-आँखों पर बिठाता,
काश! के उस रोज़,
मैं तुझको रोक पाता।

अतीत की काली गुफ़ा से,
एक सुनहरी रौशनी, बाहर को आये,
बातों ही बातों में, जो तेरा ज़िक्र आये,
इतिहास के पन्ने खुद को,
पढ़ने लग जाएं,
फिर सोचूं मैं आंखें खोल,
क्यूं न उन हसीन लम्हों को
एक बार फिर जिया जाए।
इस दिल को फिर कौन समझाए,
क्यों, बीता हुआ पल कभी लौट कर ना आये।

Picture taken from: Suggest-keywords.com

Fairytale of life

I want to be drunk, I want to be sober,
I want to be rich, I want to be poor,
I want to do a job, I want to be an entrepreneur,
I want to eat a lot, I want to have a hunger,

I want to be a thief, I want to be a king,
I want to be an assassin, I want to be a saviour,
I want to be sweet, I want to be bitter,
I want to be handsome, I want to be ugly,

Life’s a game and it’s really deadly!
I want to be authorised, I want to be ostracized,
’cause my dear friend, in life’s fairytale,

Nothing is true and everything is permitted!

हिस्सों में बँटें हुए लोग

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हिस्सों में बँटें हुए लोग
कभी अपनों से अपनों में
कभी अपने ही सपनों में
कभी रंग-रूप के पैमाने में
कभी जाम, कभी मयख़ाने में

हिस्सों में बँटें हुए लोग
कभी बँटें दोस्ती के नाम पर
कभी बिखरे है फाइलों के काम पर
कभी छूटे हैं किसी और के साथ के लिए
कभी भटके हैं अपने से अहसास के लिए

हिस्सों में बँटें हुए लोग
दर्द का सैलाब समेटे हुए हैं
कहीं अपनी ही याद में बैठे हुए हैं
खोये हुए हैं खुद ही से खुद को पाने के लिए
कभी टूटे हैं किसी और से प्यार जताने के लिए

हिस्सों में बँटें हुए लोग
बाहर से एक ही लगते हैं बंद मुट्ठी की तरह
मगर अंदर कैसे ध्वस्त हो रहे, ना जाने वजह
एक युद्ध जो हमेशा चल रहा है भीतर भी
नहीं मिलती ज़िन्दगी, हर पल जी कर भी

हिस्सों में बँट चुके हैं लोग
हिस्सों को चुन रहे हैं लोग
हिस्सों से ना बन सकेंगे लोग
हिस्से ही हैं, हिस्सों में बँटें हुए लोग
हिस्सों में बँटें हुए लोग

Picture taken from: Somos Rc