कैदी

कहो कुछ तो ऐसा कि सुकून मिल जाए मेरे सोए हुए सपनों को जूनून मिल जाए याद दिलाओ मुझे फिर से, वो बहादुरी के किस्से मेरी सूख चुकी रगों को फिर खून मिल जाए वो वक़्त कहीं पास ही छूटा, जहां हौसला मजबूत था जहां मेरे शब्दों का अर्थ और मेरा एक वजूद था बस…

नमक वाली शिकंजी

मैंने पूछा, मीठा या नमकीन? ना जाने क्यूँ,वो पहले मुस्कुराई एक बार मेरी तरफ देखा और एक बार शिकंजी बेचने वाले भैया की तरफ फिर मुस्कुराती हुई बोली – भैया नमक वाला उसकी मुस्कराहट का सुकून दिल तक पहुँचा लगा जैसे किसी को कई अरसे बाद खुश देखा है “भैया दो गिलास शिकंजी – नमक…

दोस्ती से प्यार तक

जानती थी उसे कई दिनों से, या यूँ कहूं कई महीनों से, सालों से उसके जवाबों से, उसके सवालों से खाना नहीं सिर्फ, हमने यादों बांटीं थी साथ ज़िंदगी के अच्छे-बुरे सब हिस्से सारी काली, रंग-बिरंगी रातें काटीं थी नमीं से भरी आँखों में, आसूंओं का रंग पहचाना था दुःख के थे या हंसी के,…

Happy Independence Day

वो रात याद है क्या ? नहीं किसी को भी नहीं जो आज़ादी के बाद आए, कम से कम उनको तो नहीं वो रात जिसकी सुबह कभी हुई नहीं वो रात जिसकी काली स्याही कभी मिटी नहीं वो रात जो गम और खुशियाँ एक साथ लाई थी वो रात जो उस दर्द में खुद भी…

बंजारा

एक सुनसान से घर में एक तकिया और चादर के साथ रहता हूँ कोई नहीं होता आस पास लोगों के सिर्फ जिस्म इधर उधर घूमते नज़र आते हैं परछाइयाँ भी हैं उनकी लेकिन बात नहीं करती रोज उस तकिये को पकड़ कर चादर में लिपट कर अपने अंदर बैठे अकेलेपन से बात करने की कोशिश…

सुनो, मैं यहीं रहूँगी…..

सुनो, मैं यहीं रहूँगी तुम जब मुड़कर देखोगे यहीं, मुस्कुराती हुई तुम्हारे जाने का गम छुपाती हुई मगर, तुम बस मुड़कर देखना वापस नहीं आना जो तुम पाने जा रहे हो वो छोड़कर नहीं आना कोई बात नहीं, जब थक जाओगे तो महसूस करना, मैं वहीँ होऊंगी साथ लिए हमारी हंसी की किलकारियाँ कोई बात…

सच

सच क्या है? वो जो हमें दिखाई देता है? नहीं! तो फिर वो जो हम अपने कानों से सुनते हैं? नहीं! सच एक अहसास है जो हमारा दिल महसूस करता है एक भरोसा है वो जो हमारा दिमाग दूसरों पर करता है एक ख्वाब है जो झूठ को भी सच बनाता है एक रिश्ता है…

माँ

माँ, हम तो हैं बच्चे तेरे, अक्ल के कच्चे थोड़े दिल के हैं सच्चे बड़े सर मुसीबत जो आन पड़े सब से तू फिर लड़ पड़े हम तो हैं बच्चे तेरे हमारे ही लिए तू यह सब करे तेरे लिए यह शब्द मेरे विकल्प हो जो पास मेरे, छू के मैं ये पग तेरे, जी…

चलो कलाकार बन जाता हूँ

आज भी डांट पड़ी घर वालों से मेरा रिजल्ट जो आया था पांच में से तीन विषयों में बस एक तिहाई नंबर आया था बोल रहे थे तेरे बस का क्या है ? ना पढता है, ना ही तेरे पास कोई कला है जवाब दे जरा, क्या ऐसे किसी का जीवन चला है? मैंने भी…

पंक्तियाँ भावनाओं से भरी।

वो चंद पंक्तियाँ मेरी भावनाओं से भरी, आज भी मेरे भीतर ज़िन्दा हैं, जो एक रोज़ मेरे लफ्जों पर आते आते रह गयी, तेरे चहरे की वो मासूम मुस्कुराहट आज भी मेरे जज़्बातों पर भारी है कोशिश की थी मैंने भी पूरी तुझको अपना बनाने की पर मेरी बदक़िस्मती अपना रंग दिखा गयी। याद है…