हम युवा

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आसमाँ के परिंदे भी है हम और धरती की चट्टान भी
नदी की शांत लहरें भी है और समंदर का तूफ़ान भी
है आग इतनी सीने में कि जला दे जहां सारा
और वही बन जाये सूरज करे हर तरफ उजियारा
आसमान का आखिरी छोर न सही, ज़िंदगी की डोर तो हैं हाथ में
और ये रस्ते तो यूँ ही कट जायेंगे, जब हम सब यार हैं साथ में
बस एक है कसम की मंज़िल की चाह मत छोड़ना कभी
और मंज़िल को पाने खातिर गलत राह पर कदम ना मोड़ना कभी
तो रुको नहीं बस जज़्बे को साँसों में भर के चल दो
हाथ थाम लो सबका और दुनिया को बदलने निकल दो
रंग दो जहां को अपने सपनों के रंग में
है जानते हम भी कि जीतना ही होगा हमें हर जंग में

Picture taken from: gavowzy
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काश….

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काश तू मुझे भूल गया होता और कहानियाँ वो सारी दफ़न हो गई होती
काश तेरे दिल की गालियाँ भी बाकियों की तरह बदचलन हो गई होती
काश लिखता ना लहू से तू नाम मेरा इस दुनिया की दीवारों पर
होती गर रेत पे मोहब्बत तेरी तो लहरों के साथ मिलन हो गई होती

खुशबू हर तरफ से जो तेरी आ रही थी रात भर वो कहीं खो गई होती
वो फुसफुसाहट जो मेरे कानों में थी तेरी काश कहीं दूर गम हो गई होती
काश ना सोचता मेरा दिमाग तेरे ही बारे में हर वक़्त
तो रातों को रह रह कर रुलाने वाली ये सिसकियाँ सुमदुम हो गई होती

ना तड़प होती तेरे सीने में काश मेरे साथ को अगर पाने की
तू करता हर संभव कोशिश मेरी यादों को दिल से मिटाने की
काश होता तेरा दिल भी औरों की तरह पत्थर थोड़ा
तो मैं ना होती इतनी गलत नज़रों में ज़माने की

मैं सोचती हूँ रात भर, काश हमारी कहानी ऐसे ना अधूरी होती
काश कि मेरे जीने के लिए तेरी हर सांस ज़रूरी होती
काश ना की होती हमने गलतियाँ इतनी हर बार
तो आज ये प्यार की दास्ताँ भी बाकियों की तरह पूरी होती

Picture taken from: Pixhome

मेरे खुदा

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अ खुदा तू कितना खूबसूरत है कि जब सोचूँ मुस्कुरा देती हूँ ,
क्या रुतबा है तेरा ऐसा कि जब चाहे तेरे आगे सिर झुका देती हूँ |

मेरे गुनाहों की कोई माफ़ी ना सही, मगर फिर भी सब तुझे बता देती हूँ,
जानती हूँ कि तू साथ है मेरे, इसलिए हर दिन इम्तिहान नया देती हूँ |

हारने का डर जो मन में होता है, तेरे साथ होकर उसे हरा देती हूँ,
जो जोड़ा है धन माया मैंने, तेरे पैरों में सब लूटा देती हूँ |

तेरे प्यार को जाना जब से, बाकी सब पराया सा लगता है,
तू छू दे जो मेरी दुआओं को, तो सारा जग अपनाया सा लगता है |

मैं रेत की कीमत में हूँ, हीरे का मोल ना जानूँ,
बस तू ही धरती-आकाश, जहाँ तू, बस तुझको ही मानूँ |

इबादत में तेरी जब हाथ उठाऊँ, दुनिया भूल जाती हूँ,
जुदा होकर मैं खुद से, तुझमें ही समा जाती हूँ |

तब पाती हूँ खुद को और तुझको भी अपने ही अंदर पाऊँ,
फिर क्यूँ किसी मूरत को अपना भगवान बताऊँ |

Picture taken from: wallpaperswide.com

बदलाव

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आज हँसी आती है खुद पर
कि ज़िन्दगी क्या से क्या हो गई
जो कभी सब दुःख भुला देती थी
दुःख देने वाली आज वही जुबाँ हो गई

दो कदम अकेले न चलने वाली राहें
आज खुद-ब-खुद तनहा हो गई
जिससे प्यार था इस दिल को
घुटन की अब वही वजह हो गई

सिसकियाँ भी अब खामोश हो चुकी
चीखें भी अब गुमशुदा हो गई
आँखें हर वक़्त नम रहती हैं
दर्द भरी हर कहकशाँ हो गई

चहचहाता परिंदा थी जो कभी
आज वो जीव बेजुबाँ हो गई
बस तकलीफें रह गई झोली में
खुशियाँ सब तबाह हो गई

मरने का इंतज़ार रह गया बाकि
ज़िन्दगी अब एक सजा हो गई
छीन ले मुझको मुझसे ही अब
खुदा से हर यही दुआ हो गई

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सबक सफ़र का

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उन रास्तों को देख कुछ कह रहे हैं
लाखों सफर पूरे किए, मगर वहीं रह रहे हैं
हैं सिखाते सबक़ तुझको स्थिरता का सदा
ना सोच तू परिणाम की, बस कर अपना फ़र्ज़ अदा
तू साथ चल सभी के, मगर अपना अस्तित्व खो नहीं
तू सीख सबसे कुछ ना कुछ, घमंड तुझमे हो नहीं
हैं मंज़िल की कीमतें, पर रास्ते भी ज़रूरी हैं
बिन रास्तों की समझ के, मंज़िल की चाह अधूरी है
सपने पाल आँखों में उनका भी रंग सिंदूरी है
पी ले कुछ बूँद जूनून की, ये नशा धतूरी है
चल चला चल, उस राह पर जो रुकने का ना नाम ले
बढ़ जा तू नई मुश्किलों की ओर, बस अपना जिगरा थाम ले
तू रह मुसाफिर ताउम्र, पर चाँद को छूने की चाह ना छोड़
छोड़ दे तू दुनिया सारी, बस तू अब अपनी राह ना मोड़
ये वक़्त अभी तेरा है, मगर बदलते मिनट नहीं लगती
और वक़्त गुजरने के बाद बिखरी किस्मत सिमट नहीं सकती
तो है इंतज़ार किस बात का, आगे बढ़ और इतिहास बदल दे
आज का ये दिन और अपना नाम, इतिहास में स्वर्णिम कर दे

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एक कविता की रचना

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मैं लिखना चाहती हूँ आज, मगर क्या लिखूं कुछ समझ नहीं आता है
जैसे ही कागज़ पर उतारने लगती हूँ, वो विचार का कीड़ा कहीं खो जाता है
मैं ढूँढती हूँ उसे अपनी ही गहराइयों में डूब-डूब कर, मगर नाकामी नज़र आती है
बहुत मेहनत के बाद भी, कविता की एक पंक्ति नहीं बन पाती है
मैं हर चीज़ को ताकती हूँ पहली सी नज़र से, कोई नया उसके लिए ख्याल आ जाए
क्या पता उसी चीज़ से जुड़े जीवन का, मेरे दिमाग में कोई बवाल आ जाए
जब नहीं खटखटा पाती कोई चीज़ मेरे दिमाग के दरवाजों को,तब मैं पलट कर अपने आप पर आ जाती हूँ
और अपने अंदर भरे कई अनुभवों की एक के बाद एक की ख़ाक छानते जाती हूँ
मैं ताज़ा करती हूँ अपनी बीती  हुई यादों को,
जगाने की कोशिश करती हूँ उन सोये हुए ख्वाबों को,
खोलती हूँ गर्दिले पन्ने, नया करती हूँ पुरानी किताबों को,
और कोशिश करती हूँ, कविता में बाँधने की उन बिखरे अल्फ़ाज़ों को,
फिर रंगती हूँ कागज़ को मैं अपनी कल्पनाओं के रंग से,
और लिखती हूँ कुछ पंक्तियाँ अपने ही अलग ढंग से,
ये बिखरी-बिखरी सी शब्दमालाएँ, कुछ अर्थ अंत में दे जाती हैं
और इस तरह एक आतंरिक युद्ध के बाद, एक छोटी सी कविता बन जाती है

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बाबुल की बिटिया

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उन नन्हें हाथों का स्पर्श आज फिर से महसूस हो रहा है
उन प्यारी-सी किलकारियों की गूंज से आज दिल खुश हो रहा है
मेरी नन्हीं परी का वो पहला कदम
उसके छोटे से मुख से निकला वो पहला शब्द
वो भारी स्कूल बैग का बोझ ना ढो पाना
वो कभी बेवजह रूठना और फिर खुद ही मान जाना
वो पहली बार कॉपी में ‘A’ ग्रेड मिलने की ख़ुशी
वो हर बार अपने बर्थडे के सरप्राइज की करना जासूसी
वो तेरी आँख से छलका पहला आंसू
आज के दिन सब याद कर रहा हूँ
कि कब मेरी नन्हीं गुड़िया इतनी बड़ी हो गई
कभी मेरे सहारे चलने वाली, आज मेरा सहारा बन कर खड़ी हो गई
अब बदलने वाली है तेरी ज़िन्दगी, बस मुस्कुरा कर उसे अपना ले
हम तो हैं ही तेरे दिल में, जा अब उनको भी अपना बना ले
हमेशा प्यार, इज्जत और सम्मान के ही रास्ते पर ही चलना
और अपने ससुराल में सबकी ज़िन्दगी खूबसूरत करना

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मेरी संगिनी

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तेरे मेरे दरम्यां, ये जो रिश्ता है बना
खुद रब ने हमारे बाँधी हैं ये डोरियाँ
वो वचन और कसमें थी, सात जन्मों के साथ की
मैं निभाऊँगां उन्हें सात जन्मों के बाद भी
तू जो है साथ मेरे, ये जहाँ जन्नत से भी हसीं
तू धुन है मेरे प्यार की, हमेशा मेरे दिल में गूंजती रही
मैं मुस्कुराता हूँ जब भी, होता है सामने चेहरा तेरा
तूने आकर जीवन में, ये जीवन किया पूरा मेरा
तुम मुशायरा हो मेरा, मेरी गज़लें भी तुम हो
मैं गुनगुनाता हूँ जिन्हें वो गीत मनचले भी तुम हो
नींदों के तकियों पर चादर है तेरे ख़्वाबों की
हर एक ख्याल पर मेरे, दस्तक है तेरी यादों की
है फासलें गर हमारे बीच तो क्यूँ डरना है
इन फासलों के साथ ही इश्क़ की हद से गुजरना है
है मेरा वादा तुमसे कि ये मोहब्बत कभी कम नहीं होगी
और तेरी-मेरी ये कहानी कभी खत्म नहीं होगी

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हारे हुए हम

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शमशान के मुर्दों की तरह सोए हुए हैं हम
किसी नासमझ बच्चे की तरह खोए हुए हैं हम
खामोशियों में भी चीखती रातों के गुलाम
हर अश्क़ अब खून के रोए हुए हैं हम
है गुजरती जिस तरफ से ये हवा मनचली
सूखे पत्ते की तरह बस पीछे चल पड़े
जहां रुख मुड़ गया इस बहती नदी का
बेकाबू से तिनके की तरह खींचे चल पड़े
ना बन पाए वो चट्टान कभी
जिसे कोई जोर हिला ना सके
ना छू पाए वो मुकाम कभी
जिसे चाह कर भी कोई भुला ना सके
रेत की शक्ल जैसे भी नहीं
कि सबको अपने अंदर समा लें
उड़ते-बिखरे वो बीज भी नहीं
कि कहीं जाकर नया बसेरा बसा लें
दिन के सूरज का रंग तो दूर
हम शाम की धुंधली रोशनी भी नहीं
सितारों के बीच चाँद बनना तो भूल ही जाइये
हम सितारों सी चमकती ओढनी भी नहीं
क्योंकि भूल कर हम वजूद अपना
बस किसी और को मानते रहे
ना खुद ने कभी अपनी राह बनाई
किसी और की राह से मंजिल को पहचानते रहे
खुदाई खो दी खुद ख़ुदा ने हमारे
जो हमारे भीतर कहीं शर्मशार हैं
ये लब्ज जो हम नाकामी के पढ़ते हैं
वही हमारी सबसे बड़ी हार हैं
अब तू भूल जा हर भूत को
एक नया भविष्य बनाने चल दे
तू हौंसला रख अपने अंदर
और एक कामयाब सी नई कहानी गढ़ दे
विश्वास कर अपनी आत्मा पर
कुछ नए रंगों को सजा ले
बाँध के कुछ लब्ज खुद से
और खुद को अपना ख़ुदा बना ले
ये रात-दिन, चाँद-तारे
तेरे साथी बन फिर चल पड़ेंगे
और फिर ये हवाएं, ये नदियाँ
तेरे इशारों से रुख बदलेंगे

Picture taken from: http://www.time2changellc.com

रात और दिन

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है रात काली अँधेरी, बस सुबह के इंतज़ार में
डरती है खुद से ही, पर है खुद से ही प्यार में
लब्ज तलाशती है रात भर, कुछ बातें बनाने को
साथी ढूंढती है रात भर, कुछ राज़ सुनाने को
बटोरती है सामान ये, इस कालिख की प्यास बुझाने को
मांगती है रंग नया सा, इसे रंगीन बनाने को
हर दुआ पहुंचती है उस रब तक, सुबह को लाने को
है मांगती एक भीख वो, सूरज की रौशनी पाने को
करती हैं दुआएं असर उसकी और सूरज आ गिरता है झोली में
खो जाती है रात कहीं दूर चमक में, रंग-बिरंगी सी रंगोली में
कहीं दबी-दबी सी सुनती है किलकारियाँ उन परिंदों की
स्तब्ध रह जाती है देख कर हरकतें बाशिंदों की
भागता हुआ ये दिन फिर मिल जाता है शाम में
और फिर से रात नज़र आती है हर पिघले-पिघले ज़ाम में
है अश्क़ बहाती फिर मिलती है खुद से रात नाराज़ सी
और फिर जानती है सच जीवन का, एक बात पते और राज़ की
ये जीवन है आधा-अधूरा, जो रात ना होगी दिन के साथ
रौशनी की है कीमत तभी, जब अँधेरे का हो अहसास

Picture taken from: chainimage.com