सच या झूठ

sad-wallpaper-for-boys

मैं ढूँढ़ता हूँ सच कहीं और सच कहीं और है
मैं देखता हूँ तेरी परछाई कहीं, मगर अक्ष कहीं और है
मैं रास्तों की दूरियों से मंजिल की कीमत नापता हूँ
मेरे दिल की परेशानियों से आग मैं तापता हूँ
मैं गुनगुनाता हूँ लब्ज दो, भूले पलों की याद में
मैं हर दफा एक नया आसरा तलाशता हूँ
मैं क्यूँ फ़िदा हूँ हर सच की सूरत पर
क्यूँ नहीं झूठ को अपना लेता हूँ
जब आवाज़ आती है दिल से, तू लड़ने के लिए बना है
मैं मुस्कुरा कर उसकी हाँ में हाँ मिला लेता हूँ
दिमाग खिल्ली उड़ाने लगता है मेरे दिल के ज़ज़्बातों की
हँसता है कि दिल नादान हैं
ज़िन्दगी की बड़ी सच्चाई से अनजान है
मैं सच को जी रहा हूँ मगर उसे झूठ समझता हूँ
मैं किसी सच की खोज में नहीं ,
मैं सिर्फ एक झूठ को तरसता हूँ

Picture taken from: http://www.chobirdokan.com
Advertisements

मेरे दिल की बात

Beautiful-Girls-With-Flowers-Field-HD-Wallpapers

मैं मुस्कुराऊँ तो समझना तुझे देख रही मेरी आँखें
मैं खिलखिलाउँ तो समझना मेरी यादों में हैं तेरी यादें
जब रुके ना लब मेरे, मतलब हो रहीं हैं तेरी बातें
जब मैं चुपके से तुझे निहारूँ जान लेना क्या हैं मेरे इरादे
जब मैं गिरने को हो जाऊँ तो चाहूँ तेरी बाहें
जब उंगलियां बार-बार मेरे बालों को उलझाएं सुलझाएं
तब जान लेना की मेरे कान तुझसे कुछ सुनना चाहें
जब चलते-चलते हर मोड़ पर मेरे कदम खुद-ब-खुद रुक जाएँ
तो समझ लेना की मेरी तनहा राहें तेरा साथ चाहें
जब खुल कर मेरी मुट्ठी मेरा हाथ तुझे थमाएं
तब मैं चलूँ तेरे साथ ही चाहे ज़िंदगियाँ बीत जाएँ
मैं लिख दूँ आज इस दिल की सारी भावनाएं
और बता दूँ की मेरा रोम रोम तुझे कितना चाहे
आ जरा तू करीब मेरे कि दोनों एक हो जाएँ
हम मिलें इस तरहा कि फिर सबसे ही खो जाएँ
बस हमारे कदमों के निशान बाकी रह जाएँ
और इस दुनिया को हमारे प्यार की दास्ताँ याद दिलाएं

Picture taken from: hdwallpaperbackgrounds.net

गैंग्स ऑफ़ वासेपुर

560913_330726133680736_1357723309_n

अंश पल रहा है गर्भ में
लोरियों की जगह गोलियों के गान हैं
ना भगवद गीता, ना ही पुराण है
बस मरने- मारने का प्लान है
वो अभिमन्यु है ,गर्भ में ही सीख रहा है
अपना आने वाला कल उसे अच्छे से दिख रहा है
घड़ी आ गई जन्म की, समय आ गया जंग का
गूंजी धुनें बन्दूक की, रंगा है घर खून के रंग का
वो बढ़ता जा रहा है बंदूकों के खिलौनों के साथ
सीख रहा है सीने में लोहा उतारना
समझ है उसे इन्हीं चीजों की
आता है बस खूनी नज़र से दुश्मन को निहारना
लड़कपन में अपने पिता के नाम से खौफ खूब फैला रहा है
हर गली मोहल्ला अब उसके डर से कंपकंपा रहा है
खून के बदले खून और जान की कीमत जान है
दानवता इसका इकलौता धर्म, यही इसका इमान है
यहां से गुजर दो मारते, बाकि की ना गिनती है
बस कोई बीच में ना बोलना यही सबसे विनती है
है ये बड़ा सिरफिरा रोकना-टोकना पसंद नहीं आता
गर बीच में कोई आया तो गुस्सा इसको कम नहीं आता
धांय-धांय करती बंदूकें कानों को बड़ा सुहाती हैं
जब मन किया सुनने का तब एक और जान चली जाती है
दादा को मारने वाला मरा पिता के हाथ से
खो दिया परिवार अपना मगर गया ना अपनी जात से
दिल में भी है दर्द कहीं इस उजड़े बिखरे जीवन का
पर छोड़ ना पाए ये धंधा, सवाल खड़ा यहां प्रण का
बदला ना ले ले खून का, तब तक सांस नहीं लेगा
एक और अंश है उसके पीछे फिर भी वो जान देगा
जब खेल ली होली खून की, लाल हो गया सारा जहां
अब तो वापस आना था घर, मगर निकल पड़ा वो कहाँ
वो चला खुदा के घर, अब उसका बदला लल्ला लेगा
यही कहता था वो “एक जान है या तो अल्लाह लेगा या मोहल्ला लेगा”
आज ले ली जान मोहल्ले ने, दाग दी दिल में गोलियां
अब उसकी चौखट भी ना बची, जहां बन सकें रंगोलियां

Picture taken from: bollywoodpage3.wordpress.com

इश्कबाज़

couple_love_sunset_hugs_39638_1920x1080

हर साँस के साथ तुझे जिया
हर पल तुझसे ही प्यार किया
बस लब्ज़ नहीं थे जताने को
इसलिए हमेशा तुझे नाराज़ किया

है एक दर्द सीने में, नासमझ हूँ मैं
मगर है क्या मेरे दिल में, ये कैसे कहूँ मैं
साथ तेरा कभी कभी चुभन दे जाता है
पर तुझसे दूर भी ना रह सकूँ मैं

उलझ गई है शायद हमारी सोच
कि दिलो-दिमाग पर कर दी हमने खरोंच
खून के आंसू निकले है हर बार
ना जानते हैं क्यूँ बदल गई हमारी सोच

तड़प मेरे दिल की तेरे दिल में भी है
दर्द सिर्फ राह में नहीं, मंज़िल में भी है
आ हाथ थाम ले पक्का एक-दूजे का
क्यूँ इश्क़ हमारा मुश्क़िल में भी है

चल कर ले खुद से वादा आज
कि स्थिति आये कितनी भी विराज
दिल की सुनकर दिमाग संभालेंगे
और बन कर दिखाएंगे असली इश्कबाज़

Picture taken from: wallpaperscraft.com

जुदाई का मौसम

Separation-from-dear-ones-sad-girl

ये तेरा मुस्कुराता चेहरा ना जाने फिर कब देख पाएँगे
ना जाने फिर कब हम बेसुरे गाने गाएँगे
कब फिर से साथ चलने वाले दिन आएँगे
कब सिर्फ बातों के सहारे कई मील कट जाएँगे
तेरा प्यार भरा दिल मेरे पास ही छोड़ दे
ए-खुदा इस वक़्त जुदाई को कहीं और मोड़ दे
कुछ दिन और हाथ पकड़ने के झोली में डाल दे
ये दर्द जो दिल में छिप कर बैठा है इसे निकल दे
गाने दे कुछ गीत और तेरी मोहब्बत में मुझे
कुछ ना रहे मेरे आखिरी वक़्त में, बस पाऊँ साथ तुझे
मेरी आखिरी साँसों में खुशबू तेरी बहे
मेरी ज़िंदगी जीने की वजह सदा चाहत तेरी रहे
है आ गया वक़्त की अलविदा कहना ही होगा
दिल में छिपे दर्द को अब आँखों से बहना ही होगा
पर कोई बात नहीं बिछड़ना ज़िंदगी की रीत है
चाहे ज़िंदगी उलझी हुई हो कितनी भी फिर भी हम मीत है
है साथ अगर लिखा लकीरों में तो मिला ही देगी किस्मत हमें
मगर जो भी हो आगे, रहेगी तेरी इश्क़ की सदा आदत हमें

Picture taken from: wallpapersafari.com

महफिल-ए-गम

images

जिंदगी उधार हो गई है सबकी, कि कुछ पल भी अपने नहीं रहे
कोई है नहीं सुनने वाला, जो दिल पर गुजरी वो किसे कहे
खामोशियाँ भी अब चीखती हैं कि इस दर्द को अब कैसे सहे

बंधन बन गया है हर रिश्ता, चुभने लगी है हर कसम
आँखें अब सुखती नहीं है, है अश्कों का भी एक रंग
साँसे अब उखड़ी रहती है, डगमगाता है हर कदम

सिसकियाँ चीरती रहती हैं, रात की शांत लहर को
जान लेने लगा है हर लब्ज़, मानो कोई जहर हो
बस एक कोना है आशियाना, कोई वक्त, कोई पहर हो

अधूरी कहानी के अंत की तरह, गुमनाम सा है जिंदगी का पता
ना जाने कब और कैसे, हुई हमसे ये कैसी खता
कि हर पल जीना मौत से बदत्तर, मिली इतनी बड़ी सजा

Picture taken from: 42hdphoto.blogpost.com

मेरी वो

images (1)

आपने देखा तो होगा ही उसे चहकते हुए,
मगर बहुत बार कुछ डूबी सी टहलते हुए,
लगता है नाम जैसी खुशनूमा नहीं है,
मन कहता है चाहे कुछ भी हो वो बेवफ़ा नहीं है,
बेवफ़ाई का तो अर्थ भी नहीं समझती है वो,
चाहे रुसवाई से हर पल रूबरू रहती है वो,
चेहरे से तो परियों जैसी सुन्दर है
मन से भी वो इतनी ही ख़ूबसूरत है
बहुत चाहता हूँ मैं उसे दिल की गहराई तक,
साथ रहती है वो मेरे भीड़ से तनहाई तक,
जब देखे उसे कोई तो बस उसी पर नज़रें अटक जाती है,
जब जाती है दूर नज़रों से तो ज़िन्दगी अधर में लटक जाती है,
कभी तो मन करता है कि उसे सब कुछ बता दूँ
दिल के हर एहसास से रूबरू करा दूँ
मगर डरता हूँ कि ख्वाब टूट न जाए
वो कांच की गुड़िया हाथ से मेरे छूट न जाए,
या फिर उसे कुछ कहने की ज़रूरत ही नहीं है,
जो मेरे दिल में है उसके दिल में भी वही है,
या क्या पता मैं झूठे ख्वाब में जी रहा हूँ,
और हर पल जान-बूझ कर ये ज़हर पी रहा हूँ
लेकिन इस ज़हर का भी अपने ही एक मज़ा है,
पीऊं मैं इसे, ये मेरी ही नहीं उस रब की भी रज़ा है,
उस काँच की गुड़िया को पलकों में बसा लिया है,
आँखों के ज़रिये दिल की धड़कनों में उतार लिया है,
उसके न दिखने के डर से सोता नहीं हूँ,
कहीं आंसू बनकर न बह जाए इसलिए रोता नहीं हूँ,
अब चाह कर भी मैं उसको भुला नहीं सकता,
अब हर पल यही दुआ करता हूँ मैं रब से
कि जिन राहों में मैं अकेला बैठा हूँ, कब से
एक बार तो उसके पैरों की झाँझर वहाँ भी गिरे,
मरते दम तक मेरी साँसों में उसी की सरगम बजे।

Picture taken from: wallpaperswide.com

जिंदगी का दर्द

images (4)

ज़ख्म ज़िन्दगी के न भरतें हैं ज़िन्दगी भर,
बस इस उम्मीद में ही जिए जातें हैं,
ज़रा सा झोंका बस याद का आया नहीं कि
बिन छुए हुए ही सब ज़ख्म उभर आतें हैं,
गुनगुनाते हैं फिर से वही दास्तां
उसी दुःख की ओर खिंचे जाते हैं
कहीं बांह फैलाए खड़ी होगी कोने में ख़ुशी,
मगर उसका भी गला घोंटते जाते हैं,
सुनाते हैं तराना ज़िन्दगी के जुल्मों का,
साज दर्द की आहें बन जाती हैं,
धीरे-धीरे फुसलाती सी कानों में
फिर दिलो-दिमाग़ में चिल्लाती है
जगाती है तुम्हें हसीन सपनों से
सच से रूबरू करवाती है
ये ज़िन्दगी ज़ालिम बड़ी
बस दर्द देकर भूल जाती है
हर हाथ वो झूठा होता है,
जो ये प्यार से तुम्हें सहलाती है,
धोखा है हर एक मोड़,
कहीं ख़ुशी की कोई राह नहीं,
तुम जी रहे हो घुट घुट कर चाहे,
इस ज़िन्दगी को परवाह नहीं।

Picture taken from: http://www.wallpapersxl.com

विलीनता

images (3)

विलीनता क्या है?
मुक्ति है या कोई सज़ा है?
यहाँ हर कोई
हर चीज़ के
हर बार
विलीन होने से डरता है
मगर हर दूसरे को,
हर दूसरी चीज़ को
कई बार विलीन करता है
देखों इन धुँए के बादलों को,
इन्हें भी डर है विलीनता का,
जन्म से मृत्यु तक,
ये सफर है विलीनता का,
जवानी में बचपन विलीन,
बुढ़ापे में जवानी,
मनुष्य नहीं, इस कायनात के
हर कण की यही कहानी,
यह आँखें भी इस दुनिया की
हर छवि कहाँ देख पातीं हैं,
कुछ कदम चलने पर बहुत,
दुनिया तो खुद ही विलीन हो जाती है,
मैं अश्क बहाऊँ या अपने
मुख पर हँसी को बाँध लूँ?
और अपनी, विलीनता के समय
सिर्फ अपने परमात्मा का नाम लूँ।
कि मुझे आज इस संसार से
इन बंधनों से मुक्त कर दिया,
और मुझ जैसे एक पापी को,
इस जग से विलुप्त कर दिया।

Picture taken from: wallpapersonthe.net

कहानी

images

नायिका जब मुस्कुराती है
बस तभी एक कहानी शुरु हो जाती है
बढ़ती जाती है आगे-आगे
वो अपने नायक का हाथ थामे
गुजरती है कई गलियारों से
नायिका के नैनों के इशारों से
पार होता है बचपन और आती है उसकी जवानी
ऐसे ही बनती है हर कहानी

खिलखिलाती है फिर खुशियों की धूप में
झलकता है उसका नूर नायिका के रुप में
नायक के प्रयासों से चमकती है
उसके प्यार के सहारे धीरे-धीरे चलती है
अपने नायक-नायिका के इश्क की होती है दिवानी
ऐसी ही मनचली होती है हर कहानी

गुनगुनाते हैं गीत जब वो बागों में
तब ये कहानी घर बनाती है किताबों में
एक धागा, दो लोग और सात कसमें
इन्हीं की गाथा छिपी होती है इस में
कागज है नायक और कलम है रानी
इन्हीं के प्यार से बनती है हर कहानी

कागज हमारा जीवन जैसा, किस्मत जैसी कलम
लिखती जाती हमारी कहानी, जो करे मन
दर्द भरे, खुशियाँ भरे, बेहद या दो-चार
बस कर देती है यादें इक्ट्ठा बेशुमार
इन कहानियों पर ही टिकी है जिंदगानी
तेरी नहीं, मेरी नहीं, हम सबकी यही कहानी

Picture taken from:www.bannerchristian.org