बाबुल की बिटिया

उन नन्हें हाथों का स्पर्श आज फिर से महसूस हो रहा है उन प्यारी-सी किलकारियों की गूंज से आज दिल…

मेरी संगिनी

तेरे मेरे दरम्यां, ये जो रिश्ता है बना खुद रब ने हमारे बाँधी हैं ये डोरियाँ वो वचन और कसमें…

हारे हुए हम

शमशान के मुर्दों की तरह सोए हुए हैं हम किसी नासमझ बच्चे की तरह खोए हुए हैं हम खामोशियों में…

रात और दिन

है रात काली अँधेरी, बस सुबह के इंतज़ार में डरती है खुद से ही, पर है खुद से ही प्यार में…

सच या झूठ

मैं ढूँढ़ता हूँ सच कहीं और सच कहीं और है मैं देखता हूँ तेरी परछाई कहीं, मगर अक्ष कहीं और…

मेरे दिल की बात

मैं मुस्कुराऊँ तो समझना तुझे देख रही मेरी आँखें मैं खिलखिलाउँ तो समझना मेरी यादों में हैं तेरी यादें जब रुके ना…

गैंग्स ऑफ़ वासेपुर

अंश पल रहा है गर्भ में लोरियों की जगह गोलियों के गान हैं ना भगवद गीता, ना ही पुराण है…

इश्कबाज़

हर साँस के साथ तुझे जिया हर पल तुझसे ही प्यार किया बस लब्ज़ नहीं थे जताने को इसलिए हमेशा…

जुदाई का मौसम

ये तेरा मुस्कुराता चेहरा ना जाने फिर कब देख पाएँगे ना जाने फिर कब हम बेसुरे गाने गाएँगे कब फिर…

महफिल-ए-गम

जिंदगी उधार हो गई है सबकी, कि कुछ पल भी अपने नहीं रहे कोई है नहीं सुनने वाला, जो दिल…